भगवान भोले और माता पार्वती रूप धारण की दो कन्याएं
वाराणसी । मानो तो देव नहीं पत्थर या मानो तो गंगा मां हूँ, ना मानो तो बहता पानी। इस प्रकार की तमाम कहावते हमारे धर्म एवं संस्कृतियों में कही गयी हैं। काशी के विषय में एक कहावत काफ़ी लोकप्रिय है कि भगवान भोले को यह नगरी काफ़ी प्रिय है और वह किसी न किसी रूप में काशी में विराजमान रहते है। काशी में भी उनके विराजमान का क्षेत्र और स्वरुप भी अलग अलग है।भगवान भूतनाथ का प्रिय क्षेत्र महाश्मशान हरिश्चन्द्र घाट और मनिकार्निका घाट है, जहाँ शमशान की आग कभी बुझती नहीं है।
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (14 फ़रवरी 2026)
धरती का चलता फिरता कल्प वृक्ष है गौमाता: जगदगुरू राजेन्द्रदास महाराज
नोहलेश्वर महोत्सव आस्था के साथ संस्कृति, परम्परा और सामाजिक समरसता का उत्सव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
जनगणना से ही समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की रणनीति होती है तय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
सामूहिक विवाह सबसे उत्तम, खर्चीली शादियों से बचें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
ग्वालियर कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त की जनगणना में सराहनीय भूमिका
सेवा, समर्पण और संकल्प के साथ करें कार्य : राज्यपाल पटेल
भारत भवन सिर्फ एक भवन नहीं, जीवन की रचना है, अतीत हो रहा है पुन: जीवंत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
DGCA ने Air India पर लगाया 1 करोड़ का जुर्माना
अवैध बूचड़खानों के खिलाफ हिंदू संगठन का निगम घेराव, पुलिस रोकने पर हनुमान चालीसा पाठ