बठिंडा सेंट्रल जेल में बंद सुक्खा राम की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत
बठिंडा। केंद्रीय जेल बठिंडा में बंद मानसा जिले के गांव नंगला कलां निवासी 43 वर्षीय सुक्खा राम की बीती 27 जून को संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई। जिसका शव जेल प्रशासन की तरफ से सिविल अस्पताल बठिंडा की मोर्चरी में रखवाया गया। मामले की जानकारी मिलने के बाद मृतक हवालाती के परिजन, ग्रामीण और किसान यूनियन के लोग सिविल अस्पताल बठिंडा में एकत्र हुए और जेल प्रशासन के खिलाफ रोष धरना शुरू कर दिया। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि हवालाती सुक्खा राम की मौत जेल प्रशासन की लापरवाही से हुई है, जबकि मौत होने के बाद उन्हें इसकी सूचना तक नहीं दी गई और ना ही उन्हें मौत किस प्रकार और किन हालत में हुई है, उसकी सही जानकारी जेल प्रशासन द्वारा दी गई है। मृतक के भाई राजू ने कहा कि बीती 26 जून को उसने अपने भाई सुक्खा राम से जेल के फोन के जरिए बात की थी, तब सबकुछ ठीक था। उन्होंने मामले की मजिस्ट्रेट जांच की मांग की, ताकि उन्हें मौत के असल कारणों का पता चल सके और आरोपित जेल अधिकारियों पर कानून अनुसार कार्रवाई हो सके।
उधर, मामला बढ़ता देखा ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने अस्पताल पहुंचकर मृतक के परिजनों के बयान कलमबंद किए, जबकि ड्यूटी मजिस्ट्रेट की देखरेख में सिविल अस्पताल के डाक्टरों ने मृतक हवालाती के शव का पोस्टमार्टम किया। जिसकी रिपोर्ट आनी बाकी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि मृतक सुक्खा राम रक्तदानी था, जोकि 50 से अधिक बार अपना रक्तदान कर चुका था। जिसके लिए कुछ माह पहले ही प्रदेश के सेहतमंत्री बलवीर सिंह की ओर से स्टेट अवार्ड से सम्मानित किया गया था। सिविल अस्पताल पहुंचे मृतक सुक्खा राम के छोटे भाई राजू राम ने बताया कि बीती 26 जून दिन वीरवार को दोपहर के समय उसकी अपने भाई सुक्खा से जेल से टेलीफोन पर बात हुई। तब ऐसी कोई बात नहीं थी। उनको शुक्रवार को रिश्तेदारों से पता चल कि सुक्खा राम की जेल में मौत हो गई। रात एक बजे जेल प्रशासन ने उसके भाई के शव सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखवाई, लेकिन परिवार को शुक्रवार दोपहर तक जेल प्रशासन व पुलिस की ओर से कोई सूचना नहीं दी गई।
राजू ने आरोप लगाया है कि उसका भाई ठीक था, उसकी संदिग्ध अवस्था में हुई मौत की जांच करवाई जाए और आरोपितों पर सख्त कार्रवाई की जाए। उसने बताया कि दो महीने पहले उसके भाई को साजिश के झूठे मामले में फंसाया था, तब से वह बठिंडा की जेल में बंद था। वह रक्तदानी था और वो 50 से अधिक बार रक्तदान करने पर उसे सेहतमंत्री ने स्टेट अवार्ड से सम्मानित किया था।
उधर, इस संबंध में थाना कैंट के एसएचओ दलजीत सिंह का कहना है कि मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा। पोस्टमार्टम की सारी कार्रवाई ड्यूटी मजिस्ट्रेट की देखरेख में की गई है।
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