अध्ययन चेतावनी: जलवायु परिवर्तन से घट सकता है सब्ज़ी उत्पादन
जलवायु परिवर्तन के कारण हिमाचल प्रदेश में सब्जी उत्पादन प्रभावित हो रहा है। सब्जियों की पैदावार करने वाले हिमाचल प्रदेश के सदर जैसे कुछ ब्लॉक तापमान और वर्षा में बदलाव की वजह से उच्च जोखिम में हैं। यह खुलासा डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के संयुक्त अध्ययन में हुआ है। इस अध्ययन में डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के सामाजिक विज्ञान विभाग में कार्यरत डॉ. प्रदीप सिंह, इसी विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान विभाग के डॉ. मनोज कुमार वैद्य, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र एवं समाज शास्त्र विभाग के डॉ. अमित गुलेरिया, डॉ. प्रदीप कुमार अढ़ाले समेत कई विद्वानों ने भाग लिया।
इस अध्ययन में हिमाचल प्रदेश के ऐसे क्षेत्रों के 51 ब्लॉक शामिल किए गए हैं, जो कुल 8.91 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र को कवर करते हैं। समुद्र स्तर से इन क्षेत्रों की ऊंचाई 651 से 1500 मीटर है। इन ब्लॉकों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में क्रमवार 0.04 और 0.16 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर के साथ बढ़ोतरी का रुझान देखा गया। बारिश में भी 2.89 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ बढ़ोतरी का रुझान पाया गया। इस क्षेत्र में औसत वार्षिक तापमान 15 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। बल्ह, बमसन, भोरंज, बिझड़ी, बिलासपुर सदर जैसे कुछ ब्लॉकों ने तापमान और वर्षा में बदलाव जैसे बाहरी पर्यावरणीय कारकों के कारण उच्च जोखिम संवेदनशीलता को दर्शाया।
बाहरी पर्यावरणीय कारकों के प्रति कम संवेदनशीलता की वजह से चच्योट, सुंदरनगर, द्रंग धर्मपुर, कंडाघाट, कुनिहार, नाहन, पच्छाद, राजगढ़, संगड़ाह, शिलाई और सोलन जैसे ब्लॉक कम जोखिम वाले पाए गए। घुमारवीं और मंडी सदर ने तो उच्च अनुकूलन क्षमता दिखाई, जिसकी वजह संसाधनों की प्रचुरता और यहां की पारिस्थितिकी का लचीलापन है। किसानों ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचने को विभिन्न अनुकूलन रणनीतियों को अपनाया है। इनमें फसल विविधीकरण 76.11 प्रतिशत, पोषक तत्व प्रबंधन 71.11 प्रतिशत, किस्म परिवर्तन 65.56 प्रतिशत, और जल संरक्षण 65.56 प्रतिशत तक अपनाए गए। फूलगोभी को छोड़कर अधिकांश सब्जियों पर नकारात्मक असर फूलगोभी को छोड़कर अधिकांश सब्जियों पर वर्षा का नकारात्मक असर पड़ा, जबकि उच्च तापमान ने मटर को छोड़कर सभी सब्जियों को लाभ पहुंचाया। न्यूनतम तापमान का सब्जी की फसलों से होने वाली आय के साथ सकारात्मक संबंध देखा गया।
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