MP में नई आबकारी व्यवस्था, ओवरचार्जिंग पर सख्त कार्रवाई तय
भोपाल | मध्य प्रदेश में शराब की दुकानों पर ग्राहकों से प्रिंट रेट से अधिक वसूली की शिकायतों पर लगाम लगाने के लिए आबकारी विभाग ने एक अभूतपूर्व फैसला लिया है। अब प्रदेश की हर शराब दुकान पर QR कोड लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। यह नई व्यवस्था सीधे तौर पर उन दुकानदारों के लिए चेतावनी है जो मनमानी कीमतों पर शराब बेचते थे।
पारदर्शिता के लिए 'ई-आबकारी' पोर्टल का सहारा
आबकारी विभाग द्वारा लागू की गई इस योजना के तहत, सभी दुकानों पर ई-आबकारी पोर्टल के माध्यम से जनरेट किए गए विशिष्ट QR कोड लगाए जाएंगे। इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ ग्राहकों को होगा। जैसे ही कोई ग्राहक अपने स्मार्टफोन से इस कोड को स्कैन करेगा, उसके मोबाइल स्क्रीन पर संबंधित जिले की आधिकारिक और अधिकृत रेट लिस्ट (Price List) खुल जाएगी। इससे ग्राहक और दुकानदार के बीच कीमत को लेकर होने वाला विवाद समाप्त होगा और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
कड़ी कार्रवाई: सीधे रद्द होगा लाइसेंस
आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। उन्होंने सख्त लहजे में निर्देश दिए हैं कि यदि कोई भी शराब दुकान संचालक तय कीमतों से एक रुपया भी अधिक वसूलता पाया जाता है, तो विभाग बिना किसी ढिलाई के संबंधित दुकान का लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई करेगा। विभाग का लक्ष्य उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना और अवैध वसूली को पूरी तरह बंद करना है।
एक दुकान, पांच QR कोड: डिस्प्ले के कड़े नियम
विभाग ने केवल कोड लगाने का आदेश ही नहीं दिया है, बल्कि उसके डिस्प्ले को लेकर भी मानक तय किए हैं। प्रत्येक शराब दुकान पर कम से कम पांच QR कोड लगाना अनिवार्य होगा। इन कोड्स को दुकान के ऐसे प्रमुख हिस्सों (जैसे काउंटर के सामने या प्रवेश द्वार पर) लगाया जाना चाहिए जहाँ ग्राहकों की नजर आसानी से पड़ सके और वे सहजता से स्कैन कर सकें। यदि कोई कोड फट जाता है या खराब होता है, तो उसे तुरंत बदलना दुकान मालिक की जिम्मेदारी होगी।
10 दिवसीय विशेष अभियान और निगरानी
इस नई व्यवस्था को जमीन पर उतारने के लिए आबकारी विभाग ने कमर कस ली है। 28 अप्रैल से 7 मई 2026 तक पूरे प्रदेश में एक विशेष 10 दिवसीय अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान आबकारी अधिकारी औचक निरीक्षण करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। सभी जिला अधिकारियों को इस अभियान की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट 11 मई तक मुख्यालय में जमा करने के सख्त आदेश दिए गए हैं।
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