भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट द्वारा  रीवा में जैन साध्वियों के साथ हुई दर्दनाक सड़क दुर्घटना पर गहरा शोक, संतों की सुरक्षा हेतु कड़े कदम उठाने की मांग मध्यप्रदेश के रीवा जिले में सिविल लाइन थाना क्षेत्र अंतर्गत कलेक्ट्रेट कार्यालय के समीप हुए दर्दनाक सड़क हादसे में जैन साध्वियों की मृत्यु पर भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने गहरा शोक व्यक्त किया है। ट्रस्ट ने इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं मानवता को झकझोर देने वाली घटना बताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जैन साधु-साध्वियों के विहार के दौरान विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।प्राप्त जानकारी के अनुसार बुधवार सुबह लगभग 5:45 बजे आचार्य विद्यासागर महाराज की शिष्याएं आर्यिका 105 श्रुतमति माताजी, आर्यिका माताजी एवं उपशममति माताजी सड़क किनारे पैदल विहार कर रही थीं, तभी तेज रफ्तार एवं अनियंत्रित कार ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में सागर निवासी पूज्य श्रुतमति माताजी का मौके पर ही निधन हो गया, जबकि एक अन्य आर्यिका माताजी ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। उपशममति माताजी गंभीर रूप से घायल हैं एवं उनका उपचार जारी है।घटना के बाद आरोपी चालक मौके से फरार हो गया, जिसे पुलिस ने लगभग 270 किलोमीटर दूर जबलपुर के पास बदोरिपर टोल प्लाजा से गिरफ्तार किया।भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने कहा कि जैन संत एवं साध्वियां अहिंसा, त्याग और तपस्या के प्रतीक हैं। उनके विहार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही अत्यंत चिंताजनक है। प्रशासन को ऐसे मामलों में संवेदनशीलता दिखाते हुए स्थायी सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करना चाहिए।राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील सिंह यादव ने अपने संदेश मे कहा कि “रीवा में हुई यह घटना अत्यंत पीड़ादायक एवं हृदयविदारक है। पूज्य जैन साध्वियों का इस प्रकार सड़क दुर्घटना का शिकार होना पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है। भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट मध्यप्रदेश शासन से मांग करता है कि जैन संतों एवं साध्वियों के विहार मार्गों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक नियंत्रण एवं पुलिस सहायता सुनिश्चित की जाए। दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई हो तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।”
संगठन के शिवम तिवारी, कृष्णा यादव, डॉ. प्रेम कुमार वैद्य, रामवेश सिंह राजावत, अनीता दुबे,युवराज सिंह राठौर, मनीष गुप्ता एवं जीवनलाल जैन (चाय वाले) ने संयुक्त रूप से कहा कि संत समाज केवल एक धर्म विशेष की आस्था नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों का आधार है। समाज एवं प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है कि विहार कर रहे संतों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। ट्रस्ट ने सभी सामाजिक संगठनों एवं प्रशासन से अपील की कि संतों के सुरक्षित विहार हेतु सेवा दल, सुरक्षा व्यवस्था एवं जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं।भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट दिवंगत पूज्य माताजी को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है एवं ईश्वर से प्रार्थना करता है कि घायल माताजी शीघ्र स्वस्थ हों तथा समस्त श्रद्धालुओं को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्राप्त हो।