ऑनलाइन सिस्टम का दुरुपयोग कर बनाया जा रहा था फर्जी डेटा
बस्ती आरटीओ में महाघोटाला: 4.75 करोड़ के फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस रैकेट का भंडाफोड़
लखनऊ/बस्ती: उत्तर प्रदेश के परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। बस्ती जिले में सक्रिय दलालों के एक संगठित सिंडिकेट ने अधिकारियों के साथ मिलकर 4500 से अधिक फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस (DL) जारी कर दिए हैं। इस पूरे खेल में आवेदकों से लगभग 4.75 करोड़ रुपये की अवैध वसूली किए जाने का अनुमान है।
अरुणाचल कनेक्शन: ऐसे रचा गया धोखाधड़ी का जाल
दलालों ने इस घोटाले के लिए एक अनोखा रास्ता चुना। मिर्जापुर, संतकबीरनगर, पडरौना और गोरखपुर जैसे जिलों के आवेदकों का डेटा सीधे बस्ती से न दर्ज कर, पहले अरुणाचल प्रदेश के सेप्पा और सियांग जैसे दूरदराज इलाकों से फर्जी 'बैकलॉग एंट्री' करवाई गई। इसके बाद, बस्ती आरटीओ में पता बदलने (Address Change) या नवीनीकरण (Renewal) के नाम पर रसीद काटकर सीधे परमानेंट लाइसेंस जारी कर दिए गए।
जांच में मिले कुछ प्रमुख उदाहरण:
रामतीरथ मौर्य (मिर्जापुर): इनका लाइसेंस 2018 में अरुणाचल प्रदेश से बैकलॉग एंट्री दिखाकर 2026 में बस्ती से जारी किया गया।
मनीष यादव (पडरौना): इनकी भी फीडिंग अरुणाचल से दिखाकर बस्ती में रिन्यूवल का खेल किया गया।
करण गुप्ता: इनका डेटा भी अरुणाचल के सियांग से फीड कर बस्ती से डीएल बनवा दिया गया।
नियमों की धज्जियां: न टेस्ट, न लर्नर लाइसेंस
नियमतः स्थाई लाइसेंस से पहले 'लर्नर लाइसेंस' और उसके बाद बायोमेट्रिक व वाहन टेस्ट अनिवार्य है। लेकिन इस सिंडिकेट ने मोटी रकम के बदले इन सभी प्रक्रियाओं को दरकिनार कर दिया:
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लर्नर लाइसेंस की अनदेखी: बिना लर्नर प्रक्रिया के सीधे परमानेंट डीएल बना दिए गए।
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भारी वाहनों के लाइसेंस में खेल: हेवी लाइसेंस के लिए एक साल पुराना डीएल होना अनिवार्य है, लेकिन दलालों ने इस नियम को भी ताक पर रख दिया।
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करोड़ों की वसूली: प्रत्येक आवेदक से औसतन 10,000 रुपये वसूले गए, जिससे कुल वसूली 4.75 करोड़ रुपये तक जा पहुंची।
संदेह के घेरे में आरटीओ अधिकारी
बस्ती परिवहन विभाग के अंतर्गत तैनात आरटीओ फरीदउद्दीन, आरआई सीमा गौतम और एआरटीओ माला बाजपेयी की कार्यशैली पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आश्चर्य की बात यह है कि इतना बड़ा सिंडिकेट अधिकारियों की नाक के नीचे काम करता रहा और विभाग को भनक तक नहीं लगी। सूत्रों के अनुसार, वसूली की इस बड़ी राशि में ऊपर से नीचे तक बंदरबांट होने की संभावना है।
सड़क सुरक्षा पर मंडराता खतरा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहाँ एक ओर सड़क सुरक्षा को लेकर अत्यंत सख्त हैं, वहीं परिवहन विभाग के ऐसे कारनामे राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। बिना किसी जांच और टेस्ट के अनाड़ी हाथों में दिए गए ये फर्जी लाइसेंस सड़कों पर हादसों का कारण बन सकते हैं।
बैकलॉग एंट्री का खेल क्या है?
2013 से पहले लाइसेंस मैन्युअल (रजिस्टर पर) बनते थे, जिनका डेटा अब ऑनलाइन किया जाता है, जिसे 'बैकलॉग एंट्री' कहते हैं। दलालों ने इसी सुविधा का गलत फायदा उठाया और वर्तमान तारीख के लाइसेंसों को पुराना दिखाकर फर्जी तरीके से सिस्टम में दर्ज कर दिया।
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