बैठक में टकराव: चुनाव आयोग के आरोपों के बाद ममता बनर्जी ने छोड़ी मीटिंग
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची (Voter list) के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और चुनाव आयोग के बीच विवाद बढ़ गया है। ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर ‘अहंकारी’ और ‘झूठा’ होने का आरोप लगाया, लेकिन चुनाव आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
चुनाव आयोग का दावा:
बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने झूठे आरोप लगाए, दुर्व्यवहार किया, मेज़ पर हाथ पटका और बीच में बैठक छोड़ दी।
आयोग ने कहा कि कानून का राज सर्वोपरि है और कोई भी कानून को अपने हाथ में लेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
टीएमसी नेता और विधायक चुनाव अधिकारियों को निशाना बना रहे हैं, ईआरओ कार्यालयों में तोड़फोड़ की घटनाएं हुई हैं।
व्यक्तिगत खामियां:
मतदाता सूची संशोधन में लगे अधिकारियों को बिना दबाव के काम करने दिया जाना चाहिए।
बीएलओ का मानदेय पूरी तरह नहीं मिला; 18,000 रुपये में से केवल 7,000 रुपये दिए गए।
राज्य में नियुक्त रिटर्निंग ऑफिसरों की रैंक अपेक्षित नहीं थी।
पश्चिम बंगाल सरकार ने तीन मतदाता सूची पर्यवेक्षकों का तबादला आयोग से बिना परामर्श किया।
ममता बनर्जी का बयान:
उन्होंने आयोग पर बंगाल को चुनिंदा रूप से निशाना बनाने का आरोप लगाया।
कहा कि 58 लाख लोगों के नाम हटाए गए और उन्हें अपना बचाव करने का मौका नहीं मिला।
बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को ‘अहंकारी और झूठा’ बताया और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
एमपी विधानसभा के बजट सत्र में हाई अलर्ट,परिसर में अंगरक्षकों की एंट्री पर रोक
असम में ‘मिया’ मुसलमानों को लेकर क्यों तेज हुई सियासी मुहिम? विवादित वीडियो से बढ़ा राजनीतिक टकराव
जनसंपर्क अधिकारी पर दबाव का आरोप, रॉयल प्रेस क्लब पहुंचा थाने
वाराणसी कचहरी में बम धमकी से हड़कंप, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर
कुक स्ट्रेट फतह करने वाले पहले एशियन पैरास्विमर बने सतेंद्र, 9 घंटे 22 मिनट में रचा इतिहास
राज्यसभा में कांग्रेस के भीतर तकरार, खरगे और जयराम रमेश के बीच तीखी बहस
जयपुर में दिल दहला देने वाली वारदात, पिता ने 8 महीने की मासूम की हत्या की
धीरेन्द्र शास्त्री की ‘माला-भाला’ नसीहत पर सियासी बवाल, कांग्रेस ने FIR की मांग उठाई
मनसे नेता देशपांडे ने उद्धव गुट के पार्षदों पर लगाए गंभीर आरोप… बोले- एक-एक करोड़ में बिके
कचरा प्रबंधन नियमों में बार-बार बदलाव से जमीनी हकीकत में सुधार नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट