NCP SP में टूट की अटकलों पर शरद पवार ने साफ की तस्वीर, किया बड़ा दावा
मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के भविष्य और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जाने की चल रही तीव्र अटकलों पर खुद पार्टी प्रमुख शरद पवार ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। राजनीतिक गलियारों में दल के भीतर संभावित बिखराव और गठबंधन बदलने को लेकर लगाए जा रहे कयासों पर विराम लगाते हुए वरिष्ठ राजनेता ने बेहद नपे-तुले शब्दों में कहा कि वर्तमान समय इस तरह के विषयों पर चर्चा या टिप्पणी करने के लिए बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं है। इस बयान के साथ ही उन्होंने राज्य की राजनीतिक हलचल को एक नया मोड़ दे दिया है।
सोनम वांगचुक प्रकरण पर केंद्र की नीतियों की आलोचना
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के खिलाफ हुई प्रशासनिक कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शरद पवार ने केंद्र सरकार के रवैये को पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना करार दिया। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं और शिक्षा व्यवस्था की बेहतरी के लिए शांतिपूर्ण ढंग से अनशन कर रहे एक प्रतिष्ठित व्यक्ति को बलपूर्वक हटाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। उन्होंने पुरजोर शब्दों में ऐलान किया कि विपक्ष इस दमनकारी कदम के खिलाफ एकजुट है और आगामी संसद सत्र के दौरान इस गंभीर मुद्दे को पूरी मजबूती के साथ सदन के पटल पर उठाया जाएगा।
शिक्षा मंत्री की जवाबदेही और छात्रों के भविष्य का संकट
वरिष्ठ नेता ने राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली परीक्षाओं में आई विसंगतियों का उल्लेख करते हुए सीधे तौर पर विभागीय नेतृत्व को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार मंत्री की घोर नाकामी और लचर कार्यप्रणाली के कारण आज देश के लाखों होनहार छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। ऐसे में आंदोलनकारियों द्वारा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करना पूरी तरह से तर्कसंगत और जायज था। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष को पहले से ही इस बात का अंदेशा था कि सरकार संवाद स्थापित करने के बजाय आंदोलन को कुचलने के लिए गिरफ्तारी का रास्ता चुनेगी और अंततः प्रशासन ने वही किया, लेकिन इससे यह मुहिम थमेगी नहीं।
आंदोलन की निरंतरता और विपक्ष का अटूट समर्थन
शरद पवार ने स्पष्ट किया कि भले ही पुलिस प्रशासन ने तड़के सुबह जबरन कार्रवाई करते हुए सोनम वांगचुक को धरना स्थल से उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया हो, लेकिन जनता की यह लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। विभिन्न विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं ने प्रदर्शन स्थल पर जाकर इस आंदोलन को अपना नैतिक और राजनीतिक समर्थन दिया था। उन्होंने देशवासियों को आश्वस्त किया कि अस्पताल के भीतर से भी विचारों की यह जंग जारी रहेगी और युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए इस जन आंदोलन को आगे भी बेहद आक्रामक और सुनियोजित तरीके से जारी रखा जाएगा।
किसानों की कर्जमाफी पर राज्य सरकार को अंतिम चेतावनी
महाराष्ट्र के कृषि संकट और किसानों की कर्जमाफी के संवेदनशील मुद्दे पर बोलते हुए एनसीपी प्रमुख ने महायुति सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा कर्जमाफी के क्रियान्वयन के लिए बार-बार नई तारीखें देना किसानों के साथ छलावा है और प्रशासन को अपनी पूर्व घोषित समय-सीमा का कड़ाई से पालन करना चाहिए था। उन्होंने दो टूक लहजे में चेतावनी दी कि किसानों को ऋण मुक्त करना उनकी पार्टी की सर्वोच्च प्राथमिकता है; यदि सरकार इस नई समय-सीमा के भीतर भी राहत पहुंचाने में विफल रहती है, तो पूरे महाराष्ट्र में एक विशाल और उग्र राज्यव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंका जाएगा।
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