नागपुर। आगामी मानसून सत्र में केंद्र सरकार द्वारा लाए जाने वाले बहुचर्चित परिसीमन विधेयक को लेकर देश की सियासत गरमा गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने इस मामले पर पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि विपक्ष इस विधेयक का पुरजोर विरोध करेगा। हालांकि, उन्होंने यह विकल्प भी खुला रखा कि यदि सरकार विपक्ष द्वारा सुझाए गए महत्वपूर्ण और आवश्यक संशोधनों को इस विधेयक में शामिल करने के लिए तैयार होती है, तो विपक्षी दल इस संवेदनशील मुद्दे पर दोबारा विचार करने के लिए मेज पर बैठ सकते हैं।

विधेयक के प्रावधान और सुप्रिया सुले का रुख

केंद्र सरकार की योजना आगामी 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पेश करने की है, जिसके तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने और देश में नए सिरे से परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव शामिल है। इस प्रस्तावित कानून पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने भी अपनी राय दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार सभी राज्यों में लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी का फॉर्मूला लाती है, तो इसका विरोध करने की कोई ठोस वजह नहीं होगी, लेकिन इस पर अंतिम फैसला विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' की सामूहिक बैठक में ही लिया जाएगा।

विपक्षी गठबंधन की बैठक और सामूहिक निर्णय पर जोर

संजय राउत ने सुप्रिया सुले के बयान का हवाला देते हुए कहा कि अभी यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि सरकार इसी सत्र में इस विधेयक को पटल पर रखेगी या नहीं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जब भी यह विधेयक संसद में पेश किया जाएगा, विपक्षी गठबंधन के सभी घटक दल एक साथ बैठेंगे। इसके बाद देश के संघीय ढांचे और सभी राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए गहन चर्चा की जाएगी और आगे की रणनीति को लेकर एक सर्वसम्मत तथा सामूहिक निर्णय लिया जाएगा।

पार्टी में टूट के दावों को बताया पूरी तरह बेबुनियाद

राजनीतिक गलियारों में चल रही तमाम तरह की अटकलों और अफवाहों पर विराम लगाते हुए राज्यसभा सांसद संजय राउत ने विरोधियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मीडिया में चल रही उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें विपक्षी दलों में बड़ी टूट होने या सांसदों-विधायकों को तोड़कर बहुमत जुटाने की बातें कही जा रही हैं। राउत ने स्पष्ट लहजे में कहा कि इस प्रकार की भ्रामक खबरों का जमीनी हकीकत से कोई वास्ता नहीं है और यह विपक्ष को कमजोर दिखाने की एक नाकाम कोशिश मात्र है।

राम रक्षा आंदोलन की शुरुआत और अयोध्या का मुद्दा

परिसीमन के अलावा संजय राउत ने पार्टी के आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की भी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वहां की प्रशासनिक व्यवस्था के विरोध में शिवसेना (उबाठा) शनिवार से एक बड़ा प्रदर्शन शुरू करने जा रही है, जिसे 'राम रक्षा आंदोलन' का नाम दिया गया है। इस आंदोलन के जरिए पार्टी जनता के बीच जाकर मंदिर प्रबंधन और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी और सरकार को घेरने का काम करेगी।