पुणे। महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने पुणे शहर, पुणे ग्रामीण और पिंपरी-चिंचवड़ के विभिन्न इलाकों में एक बड़ी और व्यापक कार्रवाई को अंजाम दिया है। आतंकवाद निरोधक दस्ते ने पाकिस्तान में मौजूद कुख्यात गैंगस्टर शहजाद भट्टी के साथ कथित तौर पर सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में रहने के संदेह में 51 स्थानीय युवकों को हिरासत में लिया। इस संवेदनशील मामले को लेकर सुरक्षा एजेंसी ने सभी संदिग्धों से घंटों तक बेहद गहन पूछताछ की। हालांकि, प्राथमिक पूछताछ की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी युवकों को फिलहाल छोड़ दिया गया है, लेकिन उनके संचार उपकरणों को जांच के दायरे में रखा गया है।

विदेशी गैंगस्टर के सोशल मीडिया नेटवर्क से जुड़े थे युवा

एटीएस के आला अधिकारियों से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, हिरासत में लिए गए यह सभी युवक सीमा पार बैठे गैंगस्टर शहजाद भट्टी के विभिन्न सोशल मीडिया हैंडल्स और अकाउंट्स के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे। इंटरनेट पर गैंगस्टर के पोस्ट को लाइक करने, उन पर कमेंट करने और अपनी प्रतिक्रियाएं साझा करने जैसी ऑनलाइन गतिविधियों के कारण ही ये सभी युवक सुरक्षा एजेंसी के रडार पर आ गए थे। जांच में यह बात सामने आई है कि इनमें से सबसे अधिक 33 युवक अकेले पुणे शहर के कोथरूड, येरवडा, पर्वती, विश्रांतवाड़ी, फरासखाना और कोंढवा जैसे रिहायशी इलाकों के निवासी हैं, जबकि शेष अन्य युवक पिंपरी-चिंचवड़ तथा पुणे के ग्रामीण अंचलों से ताल्लुक रखते हैं।

डिजिटल उपकरणों की जब्ती और गहन फॉरेंसिक पड़ताल

इस पूरे मामले में आतंकवाद निरोधक दस्ते ने स्थानीय पुलिस बल के साथ मिलकर एक संयुक्त अभियान चलाया और संदिग्ध युवकों के ठिकानों पर अचानक छापेमारी की। इस तलाशी अभियान के दौरान पुलिस ने सभी 51 युवकों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल उपकरणों को अपने कब्जे में लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए लैब भेज दिया है। साइबर और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम इन उपकरणों में मौजूद पर्सनल चैट, कॉन्टैक्ट लिस्ट, कॉलिंग हिस्ट्री और विदेशी हैंडल्स से आए संदेशों की बारीकी से पड़ताल कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं इनके संबंध किसी राष्ट्रविरोधी या आपराधिक नेटवर्क से तो नहीं हैं।

बिना किसी गिरफ्तारी के फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार

सुरक्षा एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे घटनाक्रम में अभी तक किसी भी युवक की आधिकारिक तौर पर गिरफ्तारी दर्ज नहीं की गई है और शुरुआती पूछताछ के बाद सभी को उनके घर जाने की अनुमति दे दी गई है। एटीएस और पुणे पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा तय की जाएगी। यदि किसी भी उपकरण से कोई आपत्तिजनक या संदिग्ध सामग्री बरामद होती है, तो संबंधित युवक को दोबारा तलब किया जाएगा। यह कार्रवाई दर्शाती है कि सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को गुमराह करने वाले विदेशी तत्वों पर कितनी पैनी नजर रख रही हैं।