परिसीमन बिल पर सरकार के सामने नई चुनौती, शरद पवार का समर्थन भी पड़ सकता है कम
नई दिल्ली: देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार ने विपक्षी खेमे को एक तगड़ा झटका देने के संकेत दिए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आगामी मानसून सत्र के दौरान शरद पवार की अगुवाई वाला गुट केंद्र की मोदी सरकार के दो बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक विधेयकों—महिला आरक्षण बिल और परिसीमन (डिलिमिटेशन) बिल का समर्थन कर सकता है। पार्टी इन दोनों विधेयकों के पक्ष में संसद के भीतर मतदान करने की रणनीति बना रही है।
फिलहाल एनडीए में शामिल होने की योजना नहीं
राजनैतिक गलियारों में इस फैसले के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या शरद पवार का गुट राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा बनने जा रहा है। हालांकि, अंदरूनी सूत्रों का स्पष्ट कहना है कि पार्टी का यह रुख केवल मुद्दों पर आधारित है। शरद पवार गुट फिलहाल एनडीए में शामिल होने के पक्ष में बिल्कुल नहीं है, बल्कि वह संसद में केवल इन विधेयकों की जरूरत को देखते हुए सरकार का साथ देगा। लोकसभा में पवार गुट के पास कुल 8 सांसद हैं, जिनका समर्थन मिलने से केंद्र सरकार को इन अहम कानूनों को आगे बढ़ाने के लिए एक मजबूत राजनीतिक बल मिलेगा।
समर्थन के बाद भी दो-तिहाई बहुमत की चुनौती
यदि शरद पवार का गुट निचले सदन में सरकार के पक्ष में खड़ा भी हो जाता है, तब भी एनडीए के लिए दो-तिहाई बहुमत का जादुई आंकड़ा पार करना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा। वर्तमान में लोकसभा के भीतर एनडीए के पास कुल 319 सांसदों का संख्या बल है। उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों के शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल होने से पहले यह संख्या 313 थी। अब शरद पवार के आठ सांसदों का साथ मिलने के बाद एनडीए का कुल आंकड़ा बढ़कर 327 तक पहुंच जाएगा। इसके बावजूद, लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत साबित करने के लिए आवश्यक 362 सीटों के मुकाबले सरकार 35 सीटें पीछे रह जाएगी।
2029 के चुनावों से पहले परिसीमन लागू करना मुख्य लक्ष्य
भले ही सदन में सरकार दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से थोड़ी दूर रह जाए, लेकिन आगामी लोकसभा चुनाव 2029 से पहले देश में परिसीमन प्रक्रिया को लागू करना भारतीय जनता पार्टी का सबसे बड़ा राजनीतिक एजेंडा माना जा रहा है। मोदी सरकार इस विधेयक को पहले भी संसद के पटल पर रख चुकी है, लेकिन आवश्यक बहुमत न होने के कारण इसे वापस लेना पड़ा था। अब विपक्षी दलों के सांसदों द्वारा मिल रहे इस संभावित समर्थन के बाद एक बार फिर सरकार द्वारा इस बिल को सदन में दोबारा पेश करने की सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
20 जुलाई से शुरू होने वाले सत्र में पेश हो सकता है विधेयक
संसद का आगामी मानसून सत्र आगामी 20 जुलाई से प्रारंभ होने जा रहा है, जिसमें इस बार भारी हंगामे के आसार हैं। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार इस सत्र के दौरान संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को संसद के सामने प्रस्तुत करने की पूरी तैयारी में है। इस नए विधेयक के माध्यम से देश में लोकसभा की कुल सीटों की संख्या को बढ़ाकर 850 करने और पूरे भारत में नए सिरे से परिसीमन की प्रक्रिया को हरी झंडी देने का बड़ा प्रस्ताव लाया जा सकता है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया बोले- दतिया उपचुनाव में BJP की होगी जीत, NEET मुद्दे पर विपक्ष को घेरा
वायरल सेलिब्रेशन पर पहली बार बोले वैभव सूर्यवंशी, आखिर किसे दिया था संदेश?
दिल्ली-हरियाणा यात्रियों को राहत, सोनीपत से कश्मीरी गेट तक दौड़ेंगी ई-बसें
यरुशलम हत्याकांड: फ्लैट में मिला भारतीय मजदूर का शव, जांच में जुटी पुलिस
NEET मुद्दे पर सियासत तेज, प्रियंका चतुर्वेदी ने मांगा धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
लॉ ग्रेजुएट्स के लिए खुशखबरी! भारतीय सेना में अधिकारी बनने का शानदार अवसर
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में उछाल, रोजगार और कारोबार के लिए खुल रहे नए द्वार
दूसरों की किस्मत बताने वाली अन्ना खुद नहीं जान पाईं अपना भविष्य, पावर बैंक ब्लास्ट में झुलसीं
विपक्ष के विरोध से नहीं चली कार्यवाही, दोनों सदनों में मचा घमासान
खर्च की रफ्तार पर CAG की चिंता, 93 हजार करोड़ रुपये का रिकॉर्ड अधूरा