मुंबई। देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों को अब महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे का बड़ा समर्थन मिला है। सोमवार को मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने आंदोलनकारियों के सुर में सुर मिलाते हुए देश के तमाम राजनीतिक दलों से एक महत्वपूर्ण अपील की। उन्होंने कहा कि छात्र हितों और समाज से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों को अपने व्यक्तिगत मतभेदों और राजनीतिक लाभ-हानि से ऊपर उठकर इस जन आंदोलन को मजबूती देनी चाहिए।

सोनम वांगचुक से अनशन तोड़ने की भावुक अपील और राहुल गांधी से समर्थन की मांग

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने दिल्ली में पिछले कई दिनों से आमरण अनशन पर बैठे देश के जाने-माने शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने वांगचुक से अपना अनिश्चितकालीन उपवास समाप्त करने की भावुक अपील करते हुए कहा कि उनका जीवन और देश के प्रति उनका योगदान बेहद अनमोल है, इसलिए उन्हें अपने स्वास्थ्य की रक्षा करनी चाहिए। इसके साथ ही ठाकरे ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का आह्वान करते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इस बड़े आंदोलन को उनका भी पूरा और सक्रिय समर्थन मिलना चाहिए।

नीट परीक्षा विवाद के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर चौबीस दिनों से जारी है महाधरना

राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित धांधलियों और अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शनकारियों का महाधरना पिछले 24 दिनों से लगातार जारी है। आंदोलनकारी युवाओं और छात्र संगठनों की मुख्य मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से तुरंत इस्तीफा दें। इसके साथ ही आंदोलनकारियों ने यह मांग भी प्रमुखता से उठाई है कि मई महीने में आयोजित हुई नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के सदमे के कारण जिन लाचार छात्रों ने हताशा में आकर आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाया, उनके पीड़ित परिवारों को सरकार की तरफ से एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक मुआवजा राशि प्रदान की जाए।

बीस जुलाई को संसद मार्च की घोषणा और आंदोलनकारी वांगचुक की गिरती सेहत

यह बड़ा विरोध प्रदर्शन बीते 20 जून से लगातार संचालित किया जा रहा है, जिसमें 28 जून को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल हुए थे और तभी से वे अन्न-जल त्याग कर भूख हड़ताल पर हैं। लगातार जारी अनशन के कारण वांगचुक की शारीरिक स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है और डॉक्टरों के मुताबिक उनका ब्लड प्रेशर लगातार गिर रहा है तथा उनका वजन भी करीब आठ किलोग्राम तक कम हो चुका है। इस बीच आंदोलनकारी संगठनों ने आगामी 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन दिल्ली की सड़कों पर उतरकर संसद भवन तक एक विशाल और ऐतिहासिक मार्च निकालने का बड़ा ऐलान कर दिया है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को जायज ठहराते हुए शिवसेना का राष्ट्रव्यापी समर्थन

उद्धव ठाकरे ने आंदोलनकारियों की आवाज को बुलंद करते हुए साफ कहा कि देश के लाखों छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ होने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से पद छोड़ने की मांग करना पूरी तरह से तर्कसंगत और न्यायोचित है, इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने घोषणा की कि 20 जुलाई को जब दिल्ली में संसद मार्च निकाला जाएगा, तो उसी दिन उनकी पार्टी शिवसेना (यूबीटी) पूरे महाराष्ट्र में सड़कों पर उतरकर इस आंदोलन के समर्थन में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन दर्ज कराएगी। इसके अलावा आगामी मानसून सत्र के दौरान शिवसेना के सभी सांसद संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे को पूरी प्रखरता से उठाएंगे, जबकि आगामी 18 जुलाई को वे स्वयं नागपुर जाकर अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े 'राम रक्षा' आंदोलन में शामिल होंगे।