पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर उस समय भारी हलचल मच गई जब राजधानी में सत्तारूढ़ गठबंधन की एक बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक बैठक शुरू होने से ठीक पहले पूर्व मुख्यमंत्री की अस्वस्थता की खबर सार्वजनिक हो गई। इस घटनाक्रम के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में कयासों और चर्चाओं का बाजार बेहद गर्म हो गया है।

एनडीए की महाबैठक से ठीक पहले शीर्ष नेता की तबीयत बिगड़ी

राजधानी पटना में आज राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की एक बड़ी और अहम बैठक आयोजित की जा रही है, जिसमें हिस्सा लेने के लिए केंद्र सरकार के कई दिग्गज मंत्री और विभिन्न सहयोगी दलों के प्रमुख नेता पहले ही यहाँ पहुंच चुके हैं। लेकिन इस महत्वपूर्ण महामंथन के शुरू होने से ऐन वक्त पहले पूर्व मुख्यमंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के अचानक बीमार होने की खबर ने सबको चौंका दिया है। बताया जा रहा है कि उन्हें अचानक अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आने और रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) में उतार-चढ़ाव की शिकायत हुई है, जिसके बाद डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनके सरकारी आवास पर पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण कर रही है।

नेताओं की बढ़ी आवाजाही और मुख्यमंत्री आवास पर सियासी सरगर्मी

स्वास्थ्य बिगड़ने की खबर मिलते ही उनके निवास स्थान पर अचानक वीआईपी मूवमेंट और राजनीतिक गतिविधियां काफी तेज हो गई हैं। जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष समेत कई आला नेता और करीबी पदाधिकारी स्थिति का जायजा लेने तुरंत उनके बंगले पर पहुंचे हैं। हालांकि, उनकी बीमारी की गंभीरता को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बुलेटिन या बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इस बात की पूरी आशंका जताई जा रही है कि वे आज होने वाली इस महत्वपूर्ण महाबैठक से दूरी बना सकते हैं। उनकी अनुपस्थिति में पार्टी और सरकार की तरफ से दोनों उपमुख्यमंत्री इस बैठक में प्रतिनिधित्व करेंगे।

बीमारी के पुराने पैटर्न और राजनीतिक घटनाक्रमों का दिलचस्प संयोग

बिहार की राजनीति को करीब से देखने वाले विश्लेषक इस अस्वस्थता को पुराने अनुभवों से जोड़कर देख रहे हैं। अतीत में भी जब कभी राज्य में बड़े सियासी उलटफेर हुए हैं या गठबंधन के भीतर आंतरिक मतभेद उभरे हैं, तब-तब उनके बीमार होने या अचानक राजनीतिक परिदृश्य से दूरी बना लेने की खबरें सामने आती रही हैं। पूर्व के विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनाव के दौरान भी जब विपक्षी दलों द्वारा उनके स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठाए गए थे, तब उन्होंने अपनी पूरी सक्रियता दिखाकर विरोधियों को खामोश कर दिया था। ऐसे में ऐन मौके पर आई इस स्वास्थ्य संबंधी खबर को लेकर राजनीतिक पंडित कई तरह के मायने निकाल रहे हैं।

गठबंधन के भीतर आंतरिक गतिरोध और मतभेदों की अंदरूनी सुगबुगाहट

भले ही ऊपरी तौर पर गठबंधन सरकार में सब कुछ सामान्य दिखाने का प्रयास किया जा रहा हो, लेकिन पिछले कुछ समय से सत्ताधारी दलों के बीच आंतरिक खींचतान की खबरें लगातार छनकर बाहर आ रही हैं। मंत्रियों के विभागों में ट्रांसफर-पोस्टिंग के फैसलों पर अंतिम मुहर न लग पाना और हाल ही में हुए एक पुलिस एनकाउंटर मामले पर दोनों प्रमुख दलों के अलग-अलग रुख ने इस खाई को और चौड़ा किया है। इसके अलावा, पार्टी के भीतर ही कुछ प्रभावशाली चेहरों को लेकर जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष की भावना देखी जा रही है। माना जा रहा है कि इन तमाम राजनीतिक दबावों और अंदरूनी गतिरोधों के बीच आई अस्वस्थता की यह खबर महज एक संयोग नहीं है।