आम आदमी को महंगाई का झटका, कमजोर मानसून से बढ़ सकती हैं खाद्य कीमतें
मुंबई। इस साल आम आदमी की रसोई और थाली का बजट और अधिक बिगड़ सकता है। देश की प्रतिष्ठित रेटिंग एजेंसी 'केयरएज रेटिंग्स' (CareEdge Ratings) की होल्डिंग रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 में देश में औसत खाद्य महंगाई (Food Inflation) बढ़कर 6 फीसदी के आसपास रह सकती है। वहीं, आम उपभोक्ताओं को प्रभावित करने वाली खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) भी 5 फीसदी के उच्च स्तर पर टिक सकती है। आर्थिक और कृषि विश्लेषकों के अनुसार, इस बड़ी चिंता की मुख्य वजह मानसून की शुरुआत में हुई कम बारिश है, जिससे देश में खेती-किसानी और आगामी फसलों के उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की आशंका गहरा गई है।
रिपोर्ट के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, एक से 30 जून के बीच देश में सामान्य के मुकाबले 40 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। मानसून की इस भारी कमी ने सरकार और आम आदमी दोनों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। गौरतलब है कि मई के महीने में पहले ही खाद्य तेल की महंगाई दर 9.5 फीसदी के उच्च स्तर पर बनी हुई थी। ऐसे में कमजोर मानसून और फसलों की धीमी बुआई आने वाले दिनों में खाद्य पदार्थों की कीमतों को और ज्यादा भड़का सकती है।
जुलाई महीने में भी कम बारिश का अनुमान
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भी कृषि क्षेत्र को लेकर चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार, जुलाई में मानसून की बारिश लंबी अवधि के औसत (LPA) के 94 फीसदी से भी कम रहने का अनुमान है। इससे कृषि उत्पादन एवं खरीफ फसलों की पैदावार को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। गौरतलब है कि भारत के कृषि क्षेत्र में सालाना होने वाली कुल बारिश का लगभग 70 फीसदी हिस्सा अकेले दक्षिण-पश्चिम मानसून से ही आता है, जो इस बार उम्मीद के मुताबिक सक्रिय नहीं दिख रहा है।
इतिहास के सबसे सूखे महीनों में शुमार हुआ जून
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, भारत में साल 1901 के बाद से यानी पिछले 125 से अधिक वर्षों के इतिहास में इस बार का जून पांचवां सबसे सूखा महीना दर्ज किया गया है, जहां देश स्तर पर बारिश सामान्य से 40 फीसदी तक कम रही।
मौसम विभाग ने पहले जून में मानसून की बारिश लंबी अवधि के औसत के 92 फीसदी से कम रहने की भविष्यवाणी की थी, लेकिन जमीनी हालात उससे भी बदतर रहे। आईएमडी के ताजा बुलेटिन के अनुसार, आने वाले दिनों में भी देश के मध्य, पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों के बड़े इलाकों में औसत से कम बारिश होने का अनुमान है, जिसका सीधा असर बाजार में अनाज और सब्जियों की आपूर्ति पर पड़ेगा।
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