जग्गी वासुदेव फिर बने चर्चा का केंद्र, स्वागत के बीच नेताओं के तीखे बयान
पटना:बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की नेता रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया के जरिए सूबे की एनडीए सरकार, मुख्यमंत्री और ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव पर बेहद तीखा हमला बोला है। रोहिणी आचार्या ने राजधानी पटना में बने एशिया के सबसे बड़े श्मशान घाट के प्रबंधन को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया और आरोप लगाया कि सरकार अब मोक्ष धामों का भी 'आध्यात्मिक आउटसोर्सिंग' यानी निजीकरण करने में जुट गई है।
'आइए ना हमरा बिहार में'— महंगे अंतिम संस्कार को लेकर कसा तंज
रोहिणी आचार्या ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर सरकार की नीतियों को घेरते हुए लिखा कि "आइए ना हमरा बिहार में! करवाइए महंगा अंतिम संस्कार जग्गी के प्यार में!" उन्होंने आरोप लगाया कि महज 1 रुपये के टोकन अमाउंट पर देश के सबसे घनी आबादी वाले राज्य बिहार में करोड़ों की सरकारी ज़मीन उद्योगपतियों और चहेतों में बांटी जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस तरह की नीतियों का आधार बिहार का विकास करना है या फिर परदे के पीछे अधिकारियों और मंत्रियों को मिलने वाले उपहार हैं। रोहिणी ने इस पूरी व्यवस्था को 'जमीन बंदरबांट योजना' करार दिया।
क्या मोक्ष धाम भी अब सरकार के नियंत्रण से बाहर हैं?
पटना के श्मशान घाट के आधुनिक प्रबंधन को बाहरी हाथों में सौंपने पर आपत्ति जताते हुए आरजेडी नेता ने कहा कि अब बिहार के श्मशान घाट भी निजी हाथों में जाने के दौर से गुजर रहे हैं। ऐसा लगता है कि मौजूदा सरकार को अपने खुद के विभागों और व्यवस्थाओं से ज्यादा भरोसा बाहरी बाबाओं और कॉर्पोरेट तंत्र पर है। उन्होंने जनता की तरफ से सवाल पूछते हुए कहा कि क्या सरकार द्वारा दी जाने वाली बुनियादी जन-सुविधाएं अब सिर्फ निजी हाथों में ट्रांसफर करने के लिए ही बची हैं और क्या अब अंतिम संस्कार के स्थल भी इस राजनीति का हिस्सा बन चुके हैं।
'जिम्मेदारी कम करो, हस्तांतरण ज़्यादा करो' के नए मॉडल पर उठाए सवाल
रोहिणी आचार्या ने सरकार की इस कार्यशैली को कटघरे में खड़ा करते हुए तंज कसा कि सरकार को आधिकारिक तौर पर अपना नया मंत्र घोषित कर देना चाहिए, जो है— 'जिम्मेदारी कम करो, हस्तांतरण ज़्यादा करो'। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को हलफनामे के माध्यम से जनता को बताना चाहिए कि यह शासन का कौन सा नया मॉडल है, जिसमें श्मशान घाट का प्रबंधन भी ब्रांडेड बाबाओं के भरोसे छोड़ दिया गया है। उन्होंने आशंका जताई कि सरकार अपनी मूल जिम्मेदारियों का अंतिम संस्कार करके धीरे-धीरे सब कुछ दूसरों के हवाले सौंप रही है।
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