भ्रष्टाचार के पैसे की रिकवरी पर सवाल, ग्रामीण बोले- पूरे मामले की हो निष्पक्ष जांच
रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिला पंचायत में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और सरकारी धन की हेराफेरी रोकने के लिए बनी वैधानिक धाराओं के क्रियान्वयन पर ही गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पंचायत राज अधिनियम की धारा 40/92 के तहत दर्ज करोड़ों रुपये के वसूली प्रकरणों में कथित रूप से सांठगांठ कर फाइलों को बंद कर दिया गया, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि संबंधित निर्माण कार्य आज भी अधूरे पड़े हैं। जानकारी के अनुसार, हनुमना जनपद की बेलहा और मऊगंज जनपद की मटियरा ग्राम पंचायत सहित कई अन्य क्षेत्रों में वित्तीय गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद जांच बैठाई गई थी, जिसमें अनियमितताएं पाए जाने पर तत्कालीन सरपंचों और सचिवों के खिलाफ लाखों रुपये की वसूली की अनुशंसा कर मामले जिला पंचायत भेजे गए थे।
जांच रिपोर्ट के बाद फाइलों को बंद करने का खेल
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जिला पंचायत स्तर पर मामला पहुंचने के बाद पूरी विधिक कार्रवाई की दिशा ही बदल दी गई। जिन विकास कार्यों को पहले अधूरा मानकर उनके आधार पर शासकीय राशि की वसूली तय की गई थी, बाद में उन्हीं कार्यों की कागजी पूर्णता रिपोर्ट (कम्प्लीशन सर्टिफिकेट) प्रस्तुत कर दी गई। इसके बाद अधिरोपित की गई मूल वसूली राशि में भारी कटौती की गई और जिम्मेदार व्यक्तियों से नाममात्र की राशि जमा करवाकर पूरे प्रकरण को आनन-फानन में नस्तीबद्ध यानी बंद कर दिया गया। इस प्रशासनिक प्रक्रिया ने पूरी जांच और पारदर्शिता पर उंगलियां उठा दी हैं।
बेलहा और मटियरा पंचायतों में लाखों की कटौती के आरोप
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, ग्राम पंचायत बेलहा में तत्कालीन सरपंच मंटू कोल और सचिव रामधनी मिश्रा पर करीब 22.84 लाख रुपये की वसूली निकाली गई थी, जिसे बाद में कथित रूप से घटाकर मात्र 6 से 7 लाख रुपये कर दिया गया और मामला रफा-दफा कर दिया गया। इसी तरह मटियरा ग्राम पंचायत में भी लगभग 65 लाख रुपये की भारी-भरकम वसूली अधिरोपित थी, लेकिन वहां भी धरातल पर काम पूरा हुए बिना महज 10 लाख रुपये का सरकारी खजाने में भुगतान कराकर केस फाइल बंद कर दी गई। यदि इन दोनों मामलों की उच्च स्तरीय पड़ताल होती है, तो केवल इन दो पंचायतों में ही एक करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व की क्षति का बड़ा खुलासा हो सकता है।
भौतिक सत्यापन और फाइलों की उच्च स्तरीय जांच की मांग
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि जब निर्माण कार्य वास्तव में अपूर्ण थे, तो तकनीकी अधिकारियों ने किस आधार पर उनके पूरे होने की रिपोर्ट स्वीकार की और क्या मौके पर जाकर कोई भौतिक सत्यापन किया गया था। इस कथित प्रशासनिक शिथिलता के खिलाफ ग्रामीणों और समाजसेवियों ने मोर्चा खोलते हुए मांग की है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान धारा 40/92 के तहत बंद किए गए सभी मामलों की किसी स्वतंत्र एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। वर्तमान में क्षेत्र के नागरिकों की नजरें राज्य सरकार और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो जैसी जांच एजेंसियों के रुख पर टिकी हैं कि क्या भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने वाले इस तंत्र पर कोई दंडात्मक कार्रवाई होती है या नहीं।
क्या है मामला? कल्याण बनर्जी के निलंबन की वजह और आरोप जानिए
रफ्तार का कहर: पठानकोट में बस ने चार को कुचला, गुस्साई भीड़ ने बस में लगाई आग
वकीलों का फूटा गुस्सा, दिल्ली घटना के विरोध में डीएम कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन
भारत-जिम्बाब्वे सीरीज से पहले मेजबान टीम का ऐलान, नए खिलाड़ी त्सिगा पर भरोसा
वृंदावन में भक्ति में लीन दिखे विराट कोहली और अनुष्का शर्मा, प्रेमानंद महाराज से लिया आशीर्वाद
रीवा कलेक्टर का सख्त अंदाज, वेंडर को लगाई फटकार; बोले- 'वो गाली दे रही, तुम...'
सेमीकंडक्टर सेक्टर में भारत की बड़ी छलांग, चिप पैकेजिंग के लिए मेगा प्लान तैयार
तमिलनाडु सरकार का फैसला, अस्पतालों में शुरू होगा QDENGA टीकाकरण
महंगा हुआ कच्चा तेल, अब आम आदमी की जेब पर बढ़ सकता है बोझ
सिंहस्थ में तीसरी आंख का पहरा, हर गतिविधि होगी कैमरों में रिकॉर्ड