क्या विपक्ष में एक और दरार? AAP सांसदों को लेकर अटकलें तेज
नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' (INDIA) में मची बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल का दावा करते हुए शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोला है। विपक्षी बयानों पर पलटवार करते हुए आठवले ने कहा कि उद्धव ठाकरे के लिए अब अपने बचे हुए सांसदों और विधायकों को एकजुट रखना लगभग असंभव हो गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे ने साल 2019 में देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनने के लिए समर्थन न देकर अपने राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी भूल की थी। अगर वे उस समय सही और दूरदर्शी फैसला लेते, तो आज खुद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद पर होते।
देशभर के विपक्षी दलों में बड़ी टूट का दावा
केंद्रीय मंत्री आठवले ने दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 लोकसभा सांसद अब मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली मूल शिवसेना के साथ आ चुके हैं, जिससे महाराष्ट्र में एनडीए और महायुति गठबंधन की ताकत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। उन्होंने आगे कहा कि विपक्षी खेमे में यह हलचल केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी बड़े समीकरण बदल रहे हैं। आठवले के मुताबिक, तमिलनाडु में डीएमके ने कांग्रेस से अपना पुराना नाता तोड़ लिया है, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के कई सांसद पहले ही एनडीए के पाले में आ चुके हैं और अब दिल्ली-पंजाब की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) के लोकसभा सदस्य भी जल्द ही हमारे साथ जुड़ सकते हैं।
'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' और दो-तिहाई बहुमत
महिला आरक्षण से जुड़े परिसीमन बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने पूरा भरोसा जताया कि मोदी सरकार इस ऐतिहासिक कानून को जल्द ही संसद से पारित कराने जा रही है। उन्होंने रणनीतिक संकेत देते हुए कहा कि आगामी सत्र के दौरान सदन में सरकार के पास आसानी से दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा होगा, जिससे देशहित से जुड़े तमाम बड़े और कड़े कूटनीतिक फैसले लेना बेहद आसान हो जाएगा।
लोकसभा अध्यक्ष से मिले बागी सांसद, अन्य राज्यों में भी सुगबुगाहट
इस बीच, शिवसेना (यूबीटी) के बागी सांसदों ने दिल्ली पहुंचकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की और उनके सामने अपना कानूनी पक्ष रखा। ये सांसद सदन में खुद को एक अलग गुट के तौर पर मान्यता दिए जाने की मांग कर रहे हैं और जल्द ही एकनाथ शिंदे की शिवसेना में अपने आधिकारिक विलय की तैयारी में हैं। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर बड़ी टूट की सुगबुगाहट तेज हो गई है; वहां के स्थानीय मंत्रियों ने दावा किया है कि सपा के कई सांसद भाजपा में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हालांकि, उद्धव गुट के वफादार नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष से लिखित अपील की है कि वे इस दलबदल मामले में कोई भी अंतिम निर्णय देश के कानून, संविधान और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के दायरे में रहकर ही लें। फिलहाल लोकसभा में आम आदमी पार्टी के 3 सांसद हैं, जिनके पाला बदलने की खबरों ने देश की सियासी सरगर्मियों को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
इससे पहले राज्यसभा में हुआ था 'आप' सांसदों का बड़ा विलय
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि लोकसभा के इन घटनाक्रमों की नींव पहले ही रखी जा चुकी थी, जब आम आदमी पार्टी (आप) के 7 राज्यसभा सांसदों ने एक साथ अपनी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। उच्च सदन के तत्कालीन सभापति सीपी राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी के इन सभी सम्मानित सदस्यों के भाजपा में आधिकारिक विलय को अपनी मंजूरी दे दी थी। आम आदमी पार्टी से नाता तोड़कर पाला बदलने वाले इन प्रमुख नेताओं में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक कुमार मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी जैसे कद्दावर चेहरे शामिल थे।
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