शेयर बाजार में शानदार शुरुआत, सेंसेक्स-निफ्टी चढ़े; डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ रुपया
मुंबई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में आई नरमी और अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते की उम्मीदों के चलते पिछले तीन सत्रों से जारी तेजी पर बुधवार को ब्रेक लगता दिखा। सुबह के कारोबारी सत्र में घरेलू शेयर बाजार के दोनों मुख्य सूचकांक लगभग स्थिर या सपाट स्तर पर कारोबार करते नजर आए। शुरुआती उठापटक के बीच बंबई स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स महज 8.58 अंक अथवा 0.01 प्रतिशत की मामूली बढ़त लेकर 76,817.58 के स्तर पर बना हुआ था, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी सूचकांक सिर्फ 1 अंक की गिरावट के साथ 23,988 के स्तर पर रेंगता दिखा। इससे पहले, शुरुआती घंटी बजते ही 30 शेयरों पर आधारित सेंसेक्स 284.69 अंक यानी 0.37 प्रतिशत की मजबूती के साथ 77,093.17 के इंट्राडे उच्च स्तर तक भी गया, और 50 शेयरों वाला निफ्टी भी 58.89 अंक की बढ़त लेकर 24,044.50 पर खुला था। विभिन्न सेक्टर्स की बात करें तो निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सूचकांक 1.26 फीसदी की तेजी के साथ सबसे आगे रहा, जिसके बाद निफ्टी आईटी और निफ्टी मीडिया में बढ़त दर्ज की गई।
फार्मा शेयरों में लिवाली और मेटल-रियल्टी में मुनाफावसूली
बाजार के रुख को देखें तो आज हेल्थकेयर और फार्मास्युटिकल सेक्टर के शेयरों में निवेशकों ने अच्छी रुचि दिखाई, जिससे निफ्टी फार्मा 0.24 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.18 प्रतिशत के मुनाफे के साथ हरे निशान में टिके रहे। इसके विपरीत, धातु (मेटल) और रियल्टी संपदा से जुड़े शेयरों पर बिकवाली का भारी दबाव साफ महसूस किया गया, जिसके कारण निफ्टी मेटल में 0.87 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी में 0.68 प्रतिशत की गिरावट आ गई। इनके साथ ही निफ्टी ऑटो, निफ्टी प्राइवेट बैंक और सरकारी बैंकों का सूचकांक निफ्टी पीएसयू बैंक भी लाल निशान के भीतर ही कारोबार करते नजर आए। निफ्टी 50 के प्रमुख शेयरों में हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, एनटीपीसी, ट्रेंट, ओएनजीसी, भारती एयरटेल, डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज और एक्सिस बैंक के भाव टूटने से बाजार पर दबाव बना रहा।
क्रूड ऑयल की गिरावट से भारतीय बाजार को बड़ी राहत
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, आने वाले कुछ दिनों में भारतीय शेयर बाजार की चाल दो मुख्य वजहों से तय होगी, जिनमें से एक भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अच्छी है तो दूसरी थोड़ी चिंताजनक है। अच्छी बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बड़ी गिरावट आ रही है। बीते पांच दिनों के भीतर वैश्विक मानक माना जाने वाला ब्रेंट क्रूड तकरीबन 16 फीसदी तक टूटकर करीब 79 डॉलर प्रति बैरल के पास आ गया है, जिससे भारत के चालू खाता घाटे (पेमेंट डेफिसिट) को लेकर बनी चिंताएं काफी हद तक कम हुई हैं। कमोडिटी मार्केट में ताजा गिरावट के बाद ब्रेंट क्रूड 0.72 प्रतिशत और फिसलकर 78.39 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी लगभग 1 प्रतिशत की मंदी के साथ 75.35 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
कमजोर मानसून से खाद्य महंगाई की चिंता और मजबूत होता रुपया
शेयर बाजार के जानकारों ने दूसरी तरफ आगाह करते हुए कहा कि देश के कुछ हिस्सों में मानसून की सुस्त रफ्तार के कारण खाद्य मुद्रास्फीति (खाने-पीने की चीजों की महंगाई) बढ़ने का जोखिम खड़ा हो गया है, जो बाजार के लिए एक नकारात्मक संकेत है। हालांकि, मौसम के पिछले अनुभवों को देखते हुए यह उम्मीद भी है कि आने वाले दिनों में देश भर में मानसूनी हवाएं रफ्तार पकड़ लेंगी। इस बीच, भारतीय मुद्रा (रुपया) में लगातार आ रही मजबूती बाजार के सेंटिमेंट को सहारा दे रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों की संभावित लिवाली और डॉलर सूचकांक में नरमी के चलते आने वाले समय में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले और अधिक सुदृढ़ हो सकता है, जिससे बाजार का सकारात्मक रुख लंबी अवधि के लिए बरकरार रहेगा।
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