चंडीगढ़। हरियाणा में प्री-मानसून की दस्तक और लगातार सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। सूबे के 19 जिलों में अंधड़ चलने और कड़कती बिजली के साथ हुई झमाझम बारिश ने झुलसाने वाली गर्मी से आमजन को बड़ी राहत पहुंचाई है, जिसके चलते दिन का पारा सामान्य के मुकाबले लगभग 11 डिग्री सेल्सियस तक नीचे गिर गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने आने वाली 20 जून तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में रुक-रुक कर धूलभरी आंधी चलने और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने का सिलसिला जारी रहने की संभावना व्यक्त की है।

तापमान में जबरदस्त गिरावट और सुहावना हुआ मौसम

लगातार हो रही बारिश और ठंडी हवाओं के चलने से पूरे प्रदेश में भीषण गर्मी का असर कम हो गया है और दिन का अधिकतम तापमान 31 डिग्री से 37 डिग्री सेल्सियस के दायरे में सिमट गया है। कई जिलों में तो पारा सामान्य से बेहद कम रिकॉर्ड किया गया है, जिससे लोगों को उमस और तपिश से पूरी तरह निजात मिल गई है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, वर्तमान में जो मौसमी बदलाव दिखाई दे रहे हैं, उसके पीछे एक के बाद एक आ रहे वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ) और टर्फ लाइन की मौजूदगी मुख्य वजह है। वर्तमान में पूर्वी पाकिस्तान, पंजाब, राजस्थान सहित हरियाणा के आसमान पर नए बादलों की खेप लगातार तैयार हो रही है, जिससे हल्की बूंदाबांदी का माहौल बना रहेगा।

आगामी तीन दिनों के लिए नया मौसमी सिस्टम और अलर्ट

पूर्वानुमान के अनुसार, 18 से 20 जून के बीच उत्तर-पश्चिम भारत में एक और नया तथा अधिक प्रभावी पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की राह पर है। इस नए मौसमी तंत्र के असर से हरियाणा के साथ-साथ समूचे दिल्ली-एनसीआर के क्षेत्रों में हवाओं की रफ्तार काफी तेज हो जाएगी और अनेक स्थानों पर हल्की से लेकर मध्यम दर्जे की बारिश होने के प्रबल आसार बन रहे हैं। इस दौरान आंधी की वजह से खुले स्थानों पर विशेष एहतियात बरतने की सलाह दी गई है।

हिसार में अंधड़ से भारी तबाही और बुनियादी ढांचा प्रभावित

दूसरी ओर, बीते सोमवार की दोपहर बाद आए भीषण अंधड़ ने अकेले हिसार जिले में भारी तबाही मचाई है, जिससे वहां आम जनजीवन और विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह से ढह गई। चक्रवाती आंधी के कारण पूरे जिले में करीब 158 बिजली के पोल और 15 बड़े ट्रांसफार्मर जमीन से उखड़ कर गिर पड़े, जिसकी वजह से दर्जनों गांवों और शहरी इलाकों में घंटों तक घने अंधेरे (ब्लैकआउट) की स्थिति बनी रही। इसके अलावा, तकरीबन 40 विशालकाय पेड़ समूल नष्ट हो गए और 150 से ज्यादा पेड़ों की डालियां टूटकर गिरने से मुख्य मार्गों व कृषि क्षेत्रों में आवागमन ठप हो गया। हवा के झोंके इतने विनाशकारी थे कि लगभग 110 मकानों की छतों पर लगी सोलर प्लेटें उखड़ गईं और कई घरों के टिन शेड हवा में ताश के पत्तों की तरह उड़ गए।