Mamata Banerjee और TMC नेताओं को नोटिस, काकोली घोष के बेटे का रिएक्शन
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय अपने इतिहास के सबसे बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रही है। पार्टी न केवल विधानसभा बल्कि संसद में भी दो-फाड़ होने की कगार पर पहुंच गई है। इस बीच, टीएमसी की बागी सांसद काकोली घोष के बेटे डॉ. वैद्यनाथ घोष ने पार्टी की सर्वोच्च नेता ममता बनर्जी और महुआ मोइत्रा समेत कई शीर्ष नेताओं को कानूनी नोटिस भेजकर सियासत को और गरमा दिया है।
बागी सांसद के बेटे का दावा- 'मैंने कभी नहीं मांगा टिकट'
डॉ. वैद्यनाथ घोष ने टीएमसी के उन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने बारासात विधानसभा क्षेत्र से विधायक (MLA) का टिकट मांगा था। वैद्यनाथ ने साफ किया कि उनकी ऐसी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं थी। उन्होंने दावा किया, "मैंने कभी किसी से टिकट नहीं मांगा। चुनावी रणनीतिकार संस्था आई-पैक (I-PAC) के एक अधिकारी चंद्रभूषण राव ने खुद मुझे सबसे पहले व्हाट्सऐप पर कॉल किया था। उन्होंने मुझे विधायक का चुनाव लड़ने के लिए मनाने की कोशिश की और यहां तक कहा कि मुझे आगे चलकर मंत्री या सांसद भी बनाया जा सकता है।"
वैद्यनाथ ने आगे बताया कि आई-पैक के प्रतिनिधि और तृणमूल छात्र परिषद (TMCP) के नेता सोमपाल उन्हें हर महीने फोन करते थे, जबकि अक्टूबर से फरवरी के उन पांच महीनों के दौरान वे खुद बोस्टन में काम कर रहे थे। उन्होंने टीएमसी नेताओं से नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देने और माफी मांगने की मांग की है।
संसद और विधानसभा में दो फाड़ होने की कगार पर टीएमसी
चुनाव में मिली शिकस्त के बाद ममता बनर्जी की पार्टी के भीतर असंतोष का ज्वालामुखी फूट पड़ा है। लोकसभा में पार्टी के सांसदों का एक बड़ा धड़ा बगावत पर उतर आया है, जिसका नेतृत्व खुद वरिष्ठ सांसद काकोली घोष कर रही हैं। सामने आई बागी सांसदों की सूची में पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान, सायोनी घोष और दिग्गज अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इन बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को बकायदा एक पत्र सौंपकर केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) को समर्थन देने की बात कही है और सदन में अपने लिए अलग से बैठने की व्यवस्था करने की मांग की है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी गहराया संकट
संसद के साथ-साथ पश्चिम बंगाल विधानसभा के भीतर भी तृणमूल कांग्रेस दो धड़ों में बंट चुकी है। पार्टी के करीब 19 विधायक खुले तौर पर बागी हो चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ, विधानसभा में टीएमसी के ही एक अन्य बड़े गुट का नेतृत्व ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि ऋतब्रत बनर्जी के इस अलग गुट में करीब 58 विधायक शामिल हैं। इस भारी टूट के बाद राज्य की राजनीति में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के भविष्य को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है।
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