तीसरी सीट की उम्मीद पर पानी, कांग्रेस के अरमानों को झटका
इंदौर। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के नामांकन निरस्त होने के बाद मप्र में कांग्रेस हमलावर भी है और हताश भी है क्योंकि प्रदेश में संख्या बल के हिसाब से तीसरी सीट कांग्रेस के पास ही रहनी थी,लेकिन ऐन मौके पर नटराजन को नामांकन रद्द हो गया और बीजेपी को अप्रत्याशित खुशी भी मिल गई। इस झटके से काग्रेस अभी उभर रही है लेकिन साथ ही कांग्रेस अगले मिशन के लिए तैयार हो रही है। जी हां कांग्रेस अगले साल होने जा रहे ग्राम पंचायतों चुनावो को लेकर अपनी रणनीति तय करके आगे की दिशा में बढ़ शुरु हो गई है
साल 2027 में एमपी में होने हैं पंचायत चुनाव
दरअसल साल 2027 मध्य प्रदेश के लिए ग्राम पंचायत के चुनाव वाला साल है। हालांकि इन चुनावों के लिए बीजेपी भी रणनीति के हिसाब से तैयारी कर रही है लेकिन इसके लिए कांग्रेस ने भी अभी से प्लान बनाना शुरु कर दिया है।
रणनीति के तहत एमपी कांग्रेस इंदौर जिले की 333 ग्राम पंचायतों तक जिलाध्यक्ष पहुंचाने का काम कर रही है। संगठन को मजबूत कैसे करना है और ग्रामीणों की समस्या को कैसे हल करना है इसके लिए ग्राम पंचायत अध्यक्षों और कमेटी मेंबरों से बातचीत करने के लिए जिलाध्यक्ष ग्राम पंचायतों तक जाएंगे और समस्या निराकरण के लिए काम करेंगें।
दरअसल एमपी कांग्रेस अपने कमजोर संगठन को मजबूत करने में जुट गई है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए अभी से बूथ, ब्लॉक, वार्ड, मंडलम् और ग्राम पंचायत तक जमीन को मजबूती से पक्का करने में लग गई है। इरादे और मंशा साफ है कि किसी भी तरह से भगवा पार्टी को मात देनी है।
मिशन पर मजबूती से कांग्रेस
दरअसल इंदौर ग्रामीण में आने वाली राऊ, महू, देपालपुर और सांवेर में विधानसभा की 333 ग्राम पंचायतों में कांग्रेस ने अध्यक्ष के साथ कमेटी का गठन किया गया है। इंदौर ग्रामीण में कांग्रेस को मजबूत करने और पंचायत चुनाव के मद्देनजर जिलाध्यक्ष वानखेड़े यहां दौरा करेंगे। वानखेड़े ग्राम पंचायतों तक पहुंचकर अध्यक्ष और कमेटी के मेंबरों से पार्टी की मजबूती के लिए मंथन करेंगें।
जिलाध्यक्ष वानखेड़े ने कहा है कि कांग्रेस ने ग्राम पंचायत अध्यक्षों के साथ 2525 सदस्यों की कमेटी बनाई है। यह कमेटी गांव और लोगों की समस्याओं के बारे में जानेगी और हल करने की दिशा में काम करेगी। अगले साल होने वाले ग्राम पंचायत चुनाव में किस तरह से काम करना है और कैसी बीजेपी की रणनीती से पार पाना है सब बिंदुओं पर फोकस होगा। लिहाजा कहा जा सकता है कि कांग्रेस अब पंचायत चुनावों को लेकर गंभीरता से काम करना चाहती है।
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