दशकों पुराने जमीन विवाद को सुलझाने की कोशिशें तेज, कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी उम्मीदें
कोच्चि। केरल के उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम जॉन ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार एर्नाकुलम जिले के परीयाथुकावु क्षेत्र में दशकों से चले आ रहे भूमि विवाद का एक सर्वमान्य समाधान खोजने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास कर रही है। सरकार का लक्ष्य केरल उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित 16 जून की समय-सीमा से पहले इस संवेदनशील मसले को आपसी रजामंदी से सुलझाना है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट के एक हालिया आदेश के बाद किझक्कंबलम के समीप परीयाथुकावु में पीढ़ियों से बसे सात दलित परिवारों के सामने बेदखली और विस्थापन का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है, जिसे टालने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कवायद तेज कर दी गई है।
अदालत की समय-सीमा से पहले सौहार्दपूर्ण समाधान की उम्मीद और वार्ता का दौर जारी
उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम जॉन ने मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए भरोसा जताया कि सभी संबंधित पक्षों के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और तय तारीख से पहले इस गतिरोध को पूरी तरह समाप्त कर लिया जाएगा। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह विवाद पिछले लगभग 40 वर्षों से लंबित पड़ा हुआ है। इस लंबी अवधि के दौरान किसी भी पूर्ववर्ती शासन ने मामले की गंभीरता को नहीं समझा और न ही प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने या इस कानूनी पेच का कोई न्यायसंगत और स्थाई विकल्प खोजने के लिए कोई गंभीर या आधिकारिक पहल की।
चार दशकों से लंबित है जमीन का मामला, 14 बार लौट चुकी है पुलिस फोर्स
विवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को रेखांकित करते हुए मंत्री ने बताया कि पिछले 10 साल के इतिहास में अदालत के डिक्री (आदेश) का अनुपालन कराने और जमीन खाली कराने के लिए पुलिस बल कम से कम 14 बार मौके पर पहुंचा। मगर उन तनावपूर्ण परिस्थितियों में भी किसी भी हुकूमत ने दोनों पक्षों को एक मेज पर बैठाकर कोई ऐसा मध्यस्थता फॉर्मूला निकालने की कोशिश नहीं की, जो कानून सम्मत होने के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण से भी सभी को स्वीकार्य हो। यह सात दलित परिवार वर्तमान में जिस 2.69 एकड़ भूमि पर जीवन-यापन कर रहे हैं, उसे एक निजी मुकदमेबाजी के फैसले के बाद अदालत ने खाली करने का निर्देश दिया था।
यूडीएफ सरकार हरसंभव समझौते को तैयार, स्थगन के बावजूद बातचीत पर जोर
मंत्री रोजी एम जॉन ने स्पष्ट किया कि वर्तमान संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार इस मानवीय समस्या के स्थाई समाधान के लिए पूरी ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि दलित परिवारों के पुनर्वास और समझौते को अमलीजामा पहनाने के लिए सरकार हर हद तक जाने को तैयार है। हालांकि, जमीन विवाद को सुलझाने के उद्देश्य से बुलाई गई हालिया त्रिपक्षीय बैठक किसी अंतिम निर्णय पर पहुंचे बिना और अगली तिथि तय किए बिना स्थगित हो गई, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने साफ किया है कि समझौते के दरवाजे बंद नहीं हुए हैं और पर्दे के पीछे से मामले को सुलझाने के प्रयास निरंतर जारी हैं।
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