"नेतरहाट में पर्यटन के चमकते दावों के पीछे छिपा अंधेरा; मूलभूत सुविधाओं को मोहताज आदिम जनजाति, 12 दिनों से ठप जलापूर्ति"
लातेहार | झारखंड का सुप्रसिद्ध हिल स्टेशन नेतरहाट, जो अपनी हसीन वादियों और सदाबहार ठंडे मौसम के लिए पूरे देश में विख्यात है, उसकी तलहटी में बसा नैना गांव इन दिनों एक गंभीर त्रासदी से गुजर रहा है। इस आदिवासी बहुल इलाके के लोग पिछले 12 दिनों से बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। करीब 300 की आबादी वाले इस गांव का एकमात्र सरकारी कुआं अचानक धंस गया, जिसके बाद से यहां के 60 परिवारों के सामने पीने के पानी का विकट संकट खड़ा हो गया है।
दो किलोमीटर दूर नदी से पानी ढोने को मजबूर हैं मासूम
कुआं नष्ट होने के बाद से ही ग्रामीणों की दैनिक दिनचर्या पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने पंचायत से लेकर जिला मुख्यालय तक के आला अधिकारियों को इस गंभीर समस्या से अवगत कराया, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर केवल कोरे आश्वासन ही हाथ लगे हैं। संकट के इस दौर में गांव में पानी का एक टैंकर तक नहीं भिजवाया गया। इस चिलचिलाती गर्मी में गांव की महिलाएं और मासूम बच्चे सुबह 4 बजे उठकर करीब दो किलोमीटर दूर बहने वाली नदी से सिर पर घड़े रखकर पानी लाने को मजबूर हैं।
केवल निरीक्षण और फोटो खिंचवाने तक सीमित रहे अधिकारी
गांव के निवासी नरेश महतो, उमेश महतो और सोनू महतो ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने बताया कि पिछले कई दिनों से अफसर गांव का दौरा तो कर रहे हैं, लेकिन उनकी सक्रियता केवल मौका मुआयना करने, तस्वीरें खिंचवाने और जल्द निवारण का दिलासा देकर लौटने तक ही सीमित है। गांव की मनीता देवी ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि पानी की किल्लत से पूरा गांव बेहाल है, मगर सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता टूटने का नाम नहीं ले रही है।
फाइलों में सिमटा समाधान और सरकारी दावों की खुली पोल
जब इस विकट स्थिति को लेकर पीएचईडी (PHED) एवं स्वच्छता विभाग, लातेहार के कार्यपालक अभियंता दीपक कुमार महतो से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने दावा किया कि गांव में पानी की व्यवस्था के लिए एक नए बोरिंग का एस्टीमेट (प्राकलन) तैयार किया जा रहा है, जिसके बाद काम शुरू होगा। यह बेहद चौंकाने वाली बात है कि एक तरफ सरकार नेतरहाट को अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटन केंद्र बनाने के लिए पानी की तरह पैसा बहा रही है, वहीं दूसरी तरफ उसी की गोद में बसा एक पूरा गांव पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा है। नैना गांव के ये मौजूदा हालात शासन-प्रशासन के 'हर घर जल' अभियान के बड़े-बड़े दावों की जमीनी हकीकत को बयां कर रहे हैं।
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