शेर शावकों की मौत से मचा हड़कंप, गिर में संक्रमण का खतरा बढ़ा
गांधीनगर: गुजरात के प्रसिद्ध गिर वन क्षेत्र में चार शेर के शावकों (बच्चों) की अचानक हुई मौत से वन विभाग और राज्य सरकार पूरी तरह मुस्तैद हो गए हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, शावकों की मौत एक संक्रामक बीमारी के कारण होने की आशंका है। ऐहतियात के तौर पर प्रशासन ने 17 वयस्क शेरों को आइसोलेशन (अलग) में रखकर उनकी कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। इस संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई और अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए।
प्रभावित इलाकों में सघन चेकिंग, 17 शेरों को किया गया पृथक
समीक्षा बैठक के दौरान वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव विनोद राव ने मुख्यमंत्री को बताया कि गिर गढ़डा और बाबरिया रेंज के करीब 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी शेरों की बारीकी से ट्रैकिंग की जा रही है। वन विभाग के कर्मचारी और गार्ड लगातार जंगलों में गश्त कर वन्यजीवों की सेहत पर नजर रख रहे हैं। राहत की बात यह है कि अभी तक अन्य किसी शेर में बीमारी के कोई लक्षण नहीं पाए गए हैं, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से 17 शेरों को अलग रखकर चौबीसों घंटे मॉनिटर किया जा रहा है।
अमरेली और भावनगर में भी बढ़ी मुस्तैदी, 350 शेरों का होगा 'डी-टिकिंग' इलाज
जंगल के मुख्य हिस्से के साथ-साथ अमरेली और भावनगर जिलों के राजस्व (मानव आबादी वाले) क्षेत्रों में रहने वाले शेरों की भी रोज चेकिंग की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि गर्मियों के मौसम में वन्यजीवों में मौसमी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए गिर क्षेत्र के 350 से अधिक शेरों के लिए 'डी-टिकिंग' (शरीर से किलनियां/परजीवी हटाने) का एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस काम में जूनागढ़ वेटरनरी कॉलेज के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भी वन विभाग की मदद कर रही है।
बेबेसिया वायरस का खतरा, वन मंत्री बोले- स्थिति काबू में
वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया के अनुसार, शुरुआती जांच में दो शावकों की मौत संदिग्ध 'बेबेसिया वायरस' के संक्रमण से होने की बात सामने आई है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि गिर में महामारी जैसे कोई हालात नहीं हैं और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बेबेसिया एक ऐसा संक्रमण है जो शेरों के शरीर पर चिपकने वाली किलनियों (टिक्स) के जरिए फैलता है। इसकी वजह से जानवरों को तेज बुखार, कमजोरी और सांस लेने में तकलीफ होती है, जो समय पर इलाज न मिलने पर घातक साबित हो सकती है।
एशियाई शेरों का एकमात्र ठिकाना होने से बढ़ी चिंता
चूंकि गुजरात का गिर अभयारण्य पूरी दुनिया में एशियाई शेरों का एकमात्र प्राकृतिक निवास स्थान (प्राकृतिक घर) है, इसलिए यहाँ शेरों की सेहत से जुड़ी छोटी सी लापरवाही भी वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। इसी वजह से सरकार और वन विभाग कोई जोखिम नहीं उठाना चाहते और किसी भी बड़े खतरे को टालने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
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