CBI का छापा: IDFC बैंक के 590 करोड़ के गबन में कई ठिकानों पर कार्रवाई
चंडीगढ़: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने हरियाणा में सरकारी खजाने को भारी चपत लगाने वाले एक बड़े घोटाले के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। देश की शीर्ष जांच एजेंसी ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़े लगभग 590 करोड़ रुपये के सरकारी धन के गबन के मामले में चंडीगढ़ और पंचकूला में व्यापक छापेमारी की है। चौदह मई को की गई इस औचक कार्रवाई के दौरान जांच दल ने वित्तीय अनियमितताओं, जालसाजी और सरकारी कोष के दुरुपयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज तथा डिजिटल साक्ष्य अपने कब्जे में लिए हैं, जिससे इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश होने की उम्मीद बढ़ गई है।
सरकारी तंत्र और बैंक अधिकारियों की साठगांठ का खुलासा
यह पूरा मामला हरियाणा सरकार की सिफारिश पर सीबीआई को सौंपा गया था, जिसके बाद एजेंसी ने भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत अपनी तफ्तीश शुरू की। शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में तैनात लोक सेवकों के साथ मिलकर एक सुनियोजित साजिश रची थी। इस साठगांठ के जरिए जनता की भलाई और विकास कार्यों के लिए आवंटित सैकड़ों करोड़ रुपये की सरकारी राशि को नियमों को ताक पर रखकर निजी लाभार्थियों और संदिग्ध खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।
आभूषण विक्रेताओं और संदिग्ध ठिकानों पर सघन छापेमारी
घोटाले की कड़ियों को जोड़ने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो ने चंडीगढ़ और पंचकूला क्षेत्र में कुल सात अलग-अलग स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दायरे में न केवल संदिग्धों के आवासीय परिसर शामिल थे, बल्कि बड़े ज्वैलर्स के शोरूम, निजी संस्थाओं के कार्यालय और संदिग्ध लाभार्थियों के ठिकाने भी रहे। सीबीआई के अनुसार इस छापेमारी का मुख्य उद्देश्य उस धन के अंतिम निवेश और रूटिंग का पता लगाना था जिसे अवैध तरीके से ठिकाने लगाया गया है। इस दौरान जब्त किए गए वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल उपकरणों को आगे की फोरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित रख लिया गया है।
दर्जनों गिरफ्तारियां और संदिग्ध वित्तीय नेटवर्क की पड़ताल
इस बहुचर्चित वित्तीय घोटाले में जांच एजेंसी अब तक सोलह आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज चुकी है, जिनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। सीबीआई की विशेष टीमें इस समय कई जटिल वित्तीय लेनदेन, शेल कंपनियों और संदिग्ध हवाला नेटवर्क की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे पकड़े गए आरोपियों और जब्त दस्तावेजों की कड़ियों को जोड़ा जाएगा, वैसे-वैसे इस घोटाले में शामिल कुछ और बड़े चेहरों और सफेदपोशों के नाम सामने आ सकते हैं, जिससे गिरफ्तारियों का यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
सरकारी खजाने की सुरक्षा और सख्त कानूनी कार्रवाई का संकल्प
सीबीआई ने इस कार्रवाई के बाद साफ कर दिया है कि सरकारी धन के गबन और भ्रष्टाचार के इस पूरे नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने के लिए हर कानूनी कदम उठाया जाएगा। एजेंसी का मुख्य ध्यान उस पूरी प्रणाली को समझने और बेनकाब करने पर है जिसके जरिए इतने बड़े पैमाने पर सरकारी राशि को बैंकों से निकालकर निजी हाथों में सौंप दिया गया। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े अन्य गवाहों और संदिग्धों को भी समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है ताकि जनता की गाढ़ी कमाई के एक-एक पैसे का हिसाब लिया जा सके और दोषियों को सख्त सजा दिलाई जा सके।
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