FIR में देरी और लापरवाही पर पुलिस अधिकारियों पर एसपी की सख्त कार्रवाई
मधेपुरा: जिले के पुलिस कप्तान संदीप सिंह ने कानून व्यवस्था और जनसुनवाई में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। कर्तव्य के प्रति उदासीनता और आम जनता की शिकायतों को नजरअंदाज करने के आरोपों के चलते एसपी ने तीन थानों के प्रभारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। पुलिस अधीक्षक की इस सख्त कार्यवाही का मुख्य उद्देश्य जिले में पुलिसिंग को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और आम जनता के प्रति संवेदनशील बनाना है, ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके और अपराधियों के मन में कानून का भय बना रहे।
लापरवाह थानाध्यक्षों पर अनुशासन का डंडा
निलंबन की इस कार्यवाही की चपेट में भर्राही, बिहारीगंज और पुरैनी थानों के अध्यक्ष आए हैं, जिन्हें तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इन अधिकारियों के विरुद्ध लगातार यह शिकायतें मिल रही थीं कि वे थानों में आने वाले फरियादियों के साथ न केवल उदासीन व्यवहार करते हैं, बल्कि गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज करने में भी अनावश्यक टालमटोल की जाती है। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए जब जिला पुलिस के वरीय अधिकारियों से जांच कराई गई, तो इन थानाध्यक्षों की कार्यशैली में भारी कमियां और अपराध नियंत्रण में ढिलाई की पुष्टि हुई, जिसके परिणाम स्वरूप यह निलंबन आदेश जारी हुआ।
आपराधिक मामलों में शिथिलता और जांच की पुष्टि
तीनों निलंबित अधिकारियों के विरुद्ध विशिष्ट मामलों में गंभीर गड़बड़ियां पाई गई हैं, जिनमें चेन स्नेचिंग, लूट और बैंक डकैती जैसे संगीन अपराधों के प्रति उनकी संवेदनहीनता उजागर हुई है। बिहारीगंज के पूर्व थानाध्यक्ष पर जहां प्राथमिकी दर्ज करने में देरी का दोष सिद्ध हुआ है, वहीं पुरैनी थानाध्यक्ष पर एक व्यवसायी के साथ हुई लूट के मामले में बयान तक दर्ज न करने का गंभीर आरोप लगा है। इसी तरह भर्राही थानाध्यक्ष की कार्यप्रणाली भी बैंक लूट जैसी वारदातों के बाद अपेक्षित सक्रियता न दिखाने के कारण कटघरे में रही। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि इन अधिकारियों ने अपराध रोकने और अपराधियों को पकड़ने की दिशा में पुलिस नियमावली के अनुरूप तत्परता नहीं दिखाई।
पुलिस महकमे को स्पष्ट संदेश और वैकल्पिक व्यवस्था
एसपी संदीप सिंह ने इस कार्यवाही के माध्यम से जिले के समस्त पुलिस बल को यह कड़ा संदेश दिया है कि अपराध नियंत्रण में किसी भी स्तर की कोताही सहन नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि थानों में आने वाले हर पीड़ित की बात गंभीरता से सुनी जानी चाहिए और कानून के दायरे में त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करना अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। वर्तमान में इन तीनों थानों का कामकाज सुचारू रूप से चलाने के लिए जिम्मेदारी अपर थानाध्यक्षों को सौंप दी गई है, जबकि नए और नियमित थानाध्यक्षों की तैनाती के लिए चयन प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है ताकि क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो।
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