CBI डायरेक्टर चयन पर राहुल गांधी ने जताई असहमति, प्रक्रिया पर उठाए सवाल
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री आवास पर मंगलवार को आयोजित उच्चस्तरीय बैठक के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के नए निदेशक के चयन को लेकर राजनीतिक रार छिड़ गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए अपनी असहमति (Dissent Note) दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस महत्वपूर्ण नियुक्ति को महज एक औपचारिकता की तरह देख रही है और विपक्ष की संवैधानिक भूमिका को नजरअंदाज किया जा रहा है।
7, लोक कल्याण मार्ग पर डेढ़ घंटे चली बैठक
प्रधानमंत्री आवास पर हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शामिल हुए। करीब डेढ़ घंटे तक चली इस चर्चा में नए सीबीआई प्रमुख के नाम पर विचार किया गया। हालांकि, बैठक के तुरंत बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक पत्र साझा कर अपनी आपत्ति सार्वजनिक कर दी। उन्होंने प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष को अंधेरे में रखकर निष्पक्ष चयन संभव नहीं है।
दस्तावेजों की कमी और 'सेल्फ असेसमेंट' पर सवाल
राहुल गांधी ने अपने पत्र में चयन समिति के कामकाज के तरीके पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं:
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अधूरी जानकारी: सरकार की ओर से 69 उम्मीदवारों की सूची तो दी गई, लेकिन उनके करियर और मूल्यांकन से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलें साझा नहीं की गईं।
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रिपोर्ट साझा करने से इनकार: राहुल गांधी के अनुसार, उम्मीदवारों की 'सेल्फ असेसमेंट रिपोर्ट' और '360-डिग्री मूल्यांकन रिपोर्ट' देने से साफ मना कर दिया गया।
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रबर स्टैंप की भूमिका: उन्होंने तर्क दिया कि यदि मूल्यांकन रिपोर्ट ही नहीं दिखाई जाएगी, तो चयन प्रक्रिया में विपक्ष के नेता की उपस्थिति केवल एक 'रबर स्टैंप' बनकर रह जाएगी।
एजेंसी के 'दुरुपयोग' और पारदर्शिता का मुद्दा
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि सीबीआई का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और आलोचकों को डराने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखे अपने पुराने पत्रों (मई और अक्टूबर 2025) का हवाला देते हुए कहा कि पारदर्शिता के उनके सुझावों को लगातार अनसुना किया गया है। राहुल गांधी के अनुसार, बिना किसी कानूनी आधार के जानकारी छिपाना इस बात का संकेत है कि सरकार ने पहले ही अपना पसंदीदा उम्मीदवार तय कर लिया है।
24 मई को समाप्त हो रहा है वर्तमान निदेशक का कार्यकाल
मौजूदा सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद का कार्यकाल 24 मई को समाप्त होने वाला है, जिससे पहले नए नाम पर मुहर लगना अनिवार्य है। नियम के अनुसार, प्रधानमंत्री, सीजेआई और नेता प्रतिपक्ष की समिति द्वारा नाम तय किए जाने के बाद कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) औपचारिक आदेश जारी करता है। अब जबकि चयन प्रक्रिया विवादों में घिर गई है, यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार राहुल गांधी की आपत्तियों पर क्या रुख अपनाती है और नए निदेशक की नियुक्ति किस प्रकार संपन्न होती है।
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