हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: जूनियर नियमित तो सीनियर भी हकदार
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम और नजीर कायम करने वाला फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी विभाग में जूनियर कर्मचारी को नियमित किया जाता है तो सीनियर कर्मचारी को उससे वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने करीब 21 साल पुरानी कानूनी लड़ाई में पीआरटीसी कर्मचारी गुरमेल सिंह के पक्ष में फैसला देते हुए उनकी सेवा नियमित करने और सभी बकाया लाभ देने के आदेश दिए हैं। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने 19 मई 2004 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत याची को नियमितीकरण से वंचित रखा गया था। कोर्ट ने इसे स्पष्ट भेदभाव करार दिया। गुरमेल सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि विभाग ने उनसे जूनियर कर्मचारियों को पहले ही नियमित कर दिया, जबकि उन्हें नजरअंदाज किया गया। याची पक्ष ने दलील दी थी कि वे भी लाभ पाने वाले कर्मियों के समान सभी मानकों पर खरा उतरते थे लेकिन बिना किसी ठोस कारण के याची पक्ष का दावा खारिज किया गया था। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने माना कि यह कदम सेवा कानून के मूल सिद्धांत समानता का उल्लंघन है।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में निर्देश दिए कि याची की सेवाएं उनके जूनियर्स की नियमितीकरण तिथि से ही नियमित मानी जाएं। यह तिथि 26 जून 1997 या 28 फरवरी 1998 (जो पहले हो) तय की जाए। याची को सीनियरिटी, वेतन निर्धारण, बकाया वेतन, पेंशन लाभ व बकाया राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी दिया जाए। कोर्ट ने पूरा भुगतान तीन महीने के भीतर करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक अधिकारों से वंचित रखने पर ब्याज सहित भुगतान का आदेश सरकारी संस्थाओं के लिए चेतावनी है।
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