चार राज्यों के चुनाव बने ‘चेहरों की जंग’, ममता, स्टालिन और हिमंता सरमा की प्रतिष्ठा दांव पर
नई दिल्ली। असम (Assam), केरल (Kerala), तमिलनाडु (Tamil Nadu) और पश्चिम बंगाल (West Bengal) में जारी चुनाव (Election) इस बार पारंपरिक पार्टी बनाम पार्टी मुकाबले से आगे निकलकर बड़े नेताओं की व्यक्तिगत छवि की लड़ाई बन गए हैं। इन राज्यों में चुनावी समीकरण अब विचारधारा से ज्यादा कद्दावर मुख्यमंत्रियों (Chief Ministers) के ‘ब्रांड’ और लोकप्रियता के इर्द-गिर्द घूमते नजर आ रहे हैं।
बंगाल में ममता की सबसे कठिन परीक्षा
पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल बेहद गर्म है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने अब तक की सबसे कड़ी चुनौती मानी जा रही है। उनके समर्थक इसे ‘ममता बनाम चुनाव आयोग’ की लड़ाई तक बता रहे हैं। मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटने के बाद सियासी तनाव और बढ़ गया है। अगर ममता भाजपा को रोकने में कामयाब रहती हैं, तो 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए विपक्षी गठबंधन में उनकी भूमिका और मजबूत हो सकती है।
महिला वोट बैंक पर सियासी रणनीति
भाजपा ममता के मजबूत महिला समर्थन को चुनौती देने के लिए महिला आरक्षण संशोधन विधेयक लाने की तैयारी में है। इसके बावजूद ममता को अपने महिला और अल्पसंख्यक वोट बैंक पर भरोसा कायम है।
असम में हिमंत सरमा का दबदबा
असम में चुनावी तस्वीर काफी हद तक मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के इर्द-गिर्द केंद्रित है। कांग्रेस के गौरव गोगोई मुकाबले में हैं, लेकिन सरमा की ‘मामा’ छवि और उनके कामकाज ने भाजपा की स्थिति मजबूत की है। उन्होंने हिंदुत्व और विकास के एजेंडे को मिलाकर अपनी पकड़ मजबूत की है, खासकर हिंदू-बहुल सीटों पर पार्टी का फोकस साफ नजर आता है।
केरल में विजयन की तीसरी पारी की चुनौती
केरल में पिनाराई विजयन एक बार फिर इतिहास रचने की कोशिश में हैं। राज्य में हर पांच साल में सरकार बदलने की परंपरा को तोड़ने के बाद अब वह लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने की उम्मीद कर रहे हैं। वामपंथी नेता होते हुए भी विजयन ने व्यावहारिक राजनीति अपनाई है, जिसमें केंद्र सरकार और बाजार ताकतों के साथ संतुलन देखने को मिला है।
तमिलनाडु में स्टालिन की साख दांव पर
तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने एक सहज और मिलनसार नेता की छवि बनाई है। हालांकि उन पर आरोप भी लगे हैं, लेकिन उनकी लोकप्रियता बरकरार है। इस बार अभिनेता विजय की पार्टी ‘टीवीके’ चुनाव में नया फैक्टर बनकर उभरी है, जो खासकर युवाओं के वोट में सेंध लगा सकती है।
मतदान में दिखा जबरदस्त उत्साह
इन राज्यों में मतदाताओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही है। चुनाव आयोग के मुताबिक असम में 85%, पुडुचेरी में 90% और केरल में 78% मतदान दर्ज किया गया है, जो चुनावी जोश को दर्शाता है।
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