महिला आरक्षण बिल: आधी आबादी को सत्ता में लाने की तैयारी, विपक्ष में नाराजगी
Women’s Reservation Bill: देश में इन दिनों संसद से लेकर राजनीतिक गलियारों तक महिला आरक्षण कानून की चर्चा हो रही है. इस चर्चा के पीछे की वजह इसमें होने वाला संशोधन है. साल 2023 में महिला आरक्षण कानून संविधान के 106 वें संशोधन के रूप में पास हुआ था. उस समय ये तय हुआ था कि इस बिल को नई जनगणना पूरी होने के बाद लागू किया जाएगा. हालांकि अब सरकार का प्रस्ताव है कि इसे 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही परिसीमन किया जाए.
देश की संसद और सभी राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने वाला यह बिल अप्रैल के महीने में ही लाया जा सकता है. हालांकि विपक्षी पार्टियों का कहना है कि इस बिल को लाने से पहले ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई जाए. इसके साथ ही यह भी मांग की थी कि यह बैठक बंगाल चुनाव के बाद ही जाए. लेकिन, सरकार ने चुनाव से पहले ही इस बिल को लाने की तैयारी कर ली है.
क्या है सरकार की इस बिल को लेकर तैयारी?
केंद्र सरकार लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने के लिए एक संशोधन विधेयक लाने की योजना बना रही है. जिसमें से 273 (लगभग एक तिहाई) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. सरकार की पूरी तैयारी है कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन किया जाए. इसके साथ ही महिलाओं के लिए कोटा तय किया जाए. केंद्र सरकार की तरफ से नारी शक्ति वंदन अधिनियम साल 2023 में पारित किया गया था.
बिल को लेकर विपक्ष का क्या है रुख?
महिला आरक्षण को लेकर भले ही तमाम राजनीतिक दलों का एक ही तरह का रुख है. लेकिन एक सवाल भी उठता रहा है कि जब विधेयक को लागू होने में कई वर्ष लगेंगे तो संसद का विशेष सत्र बुलाकर सरकार ने इसे पारित क्यों कराया? सपा सांसद राम गोपाल यादव ने CAPF संशोधन बिल पर कहा कि यह सरकार अपनी संख्या के दम पर सब कुछ गलत कर रही है.इसका खामियाजा जनता भुगत रही है. विपक्षी खेमे से विशेष रूप से कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चुनावों से पहले यह विधेयक लाकर सरकार श्रेय लेना चाहती है.
जयराम ने आपत्ति जताते हुए चुनावों के बाद यानी 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है. इसके साथ यह भी कहा है कि उससे पहले महिला आरक्षण विधेयक लाया गया तो यह चुनाव आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन होगा. विपक्ष का आरोप है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे चुनावी राज्यों के संदर्भ में इस समय विधेयक लाना राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है.
पांच राज्यों में होने वाले हैं चुनाव
सरकार की तरफ से सर्वदलीय बैठक बुलाने के विपक्ष के सुझाव को भी खारिज कर दिया है. इससे यह भी साफ हो गया है कि सरकार की पूरी तैयारी है कि विधेयक को जल्द से जल्द कानूनी रूप देने की तैयारी में है. इसी महीने बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुदुचेरी में विधानसभा चुनाव हैं. इन सभी राज्यों के चुनाव के नतीजे 4 मई को जारी किए जाएंगे.
चुनावों में होगा बिल का असर?
अगले कुछ दिनों में असम, पश्चिम बंगाल, केरल, जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इसके पहले सरकार इस बिल में संशोधन की तैयारी कर रही है. इसके जरिए महिला मतदाताओं में अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार पैकेज के तौर पर महिलाओं के सामने इस तरह की योजनाओं को पेश करेगी. उन पर असर पड़ सकता है. विपक्ष इसी बात का विरोध कर रही है कि चुनाव के बाद ही इस बिल को लाया जाए.
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