मार्च में मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ चार साल के निचले स्तर पर, फिर भी रोजगार में बढ़त
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर अब भारत के विनिर्माण क्षेत्र पर दिखने लगा है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटों और मांग में अनिश्चितता के कारण मार्च महीने में भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर लगभग चार वर्षों के अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई है।
क्या कह रहे पीएमआई के ताजा आंकड़े?
एसएंडपी ग्लोबल द्वारा संकलित 'एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स' (पीएमआई) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, मार्च में यह सूचकांक गिरकर 53.9 पर आ गया है, जो फरवरी में 56.9 पर था। यह आंकड़ा 53.8 के प्रारंभिक अनुमान के लगभग अनुरूप ही है। इस गिरावट का मुख्य कारण मांग का कमजोर होना है, जिसके चलते नए ऑर्डर और उत्पादन का विस्तार लगभग चार वर्षों में अपनी सबसे धीमी दर से हुआ है। एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा, "पश्चिम एशिया में संघर्ष से जुड़ी बाधाएं वैश्विक अर्थव्यवस्था में गूंज रही हैं और भारतीय निर्माताओं पर भारी पड़ रही हैं"।
उद्योग जगत के लिए इन आंकड़ों का क्या मतलब?
निजी क्षेत्र की ओर से की गई इस सर्वे रिपोर्ट में कुछ चिंताजनक रुझानों के साथ-साथ मजबूत बुनियादी संकेत भी सामने आए हैं:
लागत में भारी वृद्धि: एल्युमीनियम, रसायन, ईंधन और स्टील की कीमतों में तेज उछाल के कारण कंपनियों को अगस्त 2022 के बाद से सबसे भारी लागत दबाव का सामना करना पड़ा है।
बिक्री मूल्य: इनपुट लागत में भारी वृद्धि के बावजूद, कंपनियों ने ग्राहकों पर पूरा बोझ नहीं डाला और पिछले दो वर्षों में सबसे धीमी गति से अपने बिक्री मूल्य बढ़ाए हैं।
निर्यात में मजबूती: मांग में समग्र सुस्ती के बावजूद विदेशी बाजारों से समर्थन मिला है, जिससे मार्च में निर्यात ऑर्डर उछलकर छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं।
रोजगार में वृद्धि: कंपनियों ने अपने लंबित काम निपटाने और भविष्य की विस्तार योजनाओं को समर्थन देने के लिए नई भर्तियां की हैं। इसके चलते रोजगार वृद्धि की दर सात महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।
अब आगे क्या
हालांकि भू-राजनीतिक तनाव और ईंधन की महंगी कीमतों ने मैन्युफैक्चरिंग की वर्तमान रफ्तार को धीमा कर दिया है, लेकिन भारत के विनिर्माता भविष्य के व्यापार को लेकर अत्यधिक आश्वस्त बने हुए हैं। कृषि क्षेत्र में मजबूती की उम्मीद और क्षमता विस्तार की योजनाओं के दम पर आगामी वर्ष के लिए निर्माताओं का व्यापारिक आशावाद मई 2024 के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।
आपत्तिजनक आचरण पर कड़ा रुख, जवाब नहीं तो सीधी कार्रवाई
Amit Shah का हमला—‘बंगाल में खाता भी नहीं खोल पाएगी कांग्रेस’, Rahul Gandhi पर साधा निशाना
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर, ईरानी सेना की जहाजों पर फायरिंग
Mallikarjun Kharge के बयान पर बवाल, BJP प्रतिनिधिमंडल ने EC से की मुलाकात
क्या आपका पीरियड फ्लो कम हो गया है? तनाव और डाइट हो सकते हैं जिम्मेदार
UP Board Result 2026: कल 4 बजे आएगा रिजल्ट, Amar Ujala पर मिलेगा डायरेक्ट लिंक
कर्नाटक में होमस्टे में विदेशी महिला से दुष्कर्म, नशीला पेय देने का आरोप; दो गिरफ्तार
तिलक वर्मा की 'विराट' उपलब्धि: गुजरात के 11 धुरंधरों पर भारी पड़ा मुंबई का यह अकेला शूरवीर।