मध्य प्रदेश में शराब दुकानों के ई-टेंडर का 8वां चरण शुरू, 27 मार्च को ऑक्शन
आरक्षित मूल्य से 15% तक ही कम बोली मान्य, समूह और व्यक्तिगत दुकानों दोनों पर होगा टेंडर; सरकार को अब तक 12,403 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व सुनिश्चित
भोपाल/ग्वालियर। मध्यप्रदेश में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कम्पोजिट मदिरा दुकानों के निष्पादन हेतु ई-टेंडर प्रक्रिया का आठवां चरण शुरू कर दिया गया है। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना द्वारा जारी संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, इस चरण में शेष बची दुकानों और समूहों का आवंटन किया जाएगा। संशोधित कार्यक्रम के मुताबिक, ऑनलाइन टेंडर डाउनलोड और ऑफर सबमिट करने की प्रक्रिया 25 मार्च शाम 4 बजे से शुरू होकर 27 मार्च दोपहर 12 बजे तक चलेगी। इसी दिन दोपहर बाद ई-टेंडर कम ऑक्शन की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें शाम 4:30 बजे से 5:30 बजे तक बोली लगेगी। यदि अंतिम समय में बोली आती है, तो हर 15 मिनट में समय बढ़ाया जाएगा।
15% से ज्यादा कम बोली पर रोक
आबकारी विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस चरण में ऑफसेट प्राइस आरक्षित मूल्य से अधिकतम 15% तक ही कम हो सकेगा। यानी किसी भी स्थिति में 85% से कम की बोली स्वीकार नहीं की जाएगी। इसके लिए BOQ में तकनीकी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।




समूह और एकल दुकान दोनों पर टेंडर
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक समूह और उसमें शामिल हर दुकान पर अलग-अलग ई-टेंडर डाले जाएंगे। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी समूह में 3 दुकानें हैं, तो कुल 4 टेंडर होंगे—एक समूह के लिए और तीन अलग-अलग दुकानों के लिए।
आवंटन का नया फार्मूला लागू
आठवें चरण में आवंटन के लिए स्पष्ट नियम तय किए गए हैं
यदि समूह पर बोली नहीं आती लेकिन दुकानों पर आती है, तो दुकानों के आधार पर आवंटन होगा
यदि समूह पर बोली आती है लेकिन सभी दुकानों पर नहीं, तो समूह की बोली मान्य होगी
यदि दोनों पर बोली आती है, तो जो अधिक राजस्व देगा, उसे प्राथमिकता मिलेगी
राजस्व में अब तक 29% की बढ़ोतरी
आबकारी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पहले से सातवें चरण तक कुल 658 समूहों का निष्पादन किया जा चुका है। इससे सरकार को लगभग 12,403.73 करोड़ रुपये का राजस्व सुनिश्चित हुआ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 29.30% अधिक है। हालांकि छठे और सातवें चरण में अपेक्षित प्रतिस्पर्धा नहीं मिलने से राजस्व में गिरावट भी दर्ज की गई, जहां सातवें चरण में 8% तक कमी देखी गई।
बड़े जिलों में मिश्रित प्रदर्शन
जिलावार आंकड़ों में इंदौर, भोपाल, ग्वालियर जैसे बड़े जिलों में लक्ष्य के मुकाबले कम प्रतिशत पर ही निष्पादन हो पाया है, जबकि मंडला, सीधी और उमरिया जैसे जिलों में 100% से अधिक राजस्व प्राप्त हुआ है।
सरकार की नजर शेष दुकानों पर
राज्य में कुल 1,172 समूहों में से अभी भी बड़ी संख्या में दुकानें शेष हैं, जिनसे लगभग 8,441 करोड़ रुपये के राजस्व की संभावना है। आठवां चरण इन शेष दुकानों के निष्पादन के लिए अहम माना जा रहा है। आठवें चरण में सख्त शर्तों और नई रणनीति के साथ सरकार अधिकतम राजस्व जुटाने की कोशिश में है। अब नजर 27 मार्च को होने वाले ऑक्शन पर है, जिससे यह तय होगा कि शेष दुकानों का कितना सफल निष्पादन हो पाता है।
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