Navratri के उपवास के बीच मे अगर Periods तो आ जाएं तो क्या करें! पूजा करनी चाहिए या नहीं, जानें क्या कहते हैं धर्म शास्त्र?
देशभर में श्रद्धा और भक्ति के साथ माता रानी की पूजा अर्चना की जा रही है. बहुत से लोग प्रतिपदा तिथि और महाअष्टमी का उपवास रखते हैं तो कुछ पूरे नौ दिन. नवरात्रि की पूजा में शुद्धता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है. ऐसे में कई महिलाओं के मन में यह सवाल उठता है कि अगर नवरात्रि के बीच में पीरियड (मासिक धर्म) आ जाए तो उन्हें क्या करना चाहिए? क्या व्रत जारी रखा जा सकता है या पूजा से दूरी बनानी चाहिए? इस विषय पर धर्म शास्त्र और आधुनिक दृष्टिकोण दोनों ही महत्वपूर्ण हैं.
आज भी निभाई जाती है यह परंपरा
धर्म शास्त्रों के अनुसार, मासिक धर्म को शारीरिक शुद्धि की एक प्राकृतिक प्रक्रिया माना गया है. परंपरागत मान्यताओं में इस दौरान महिलाओं को पूजा-पाठ, मंदिर प्रवेश और धार्मिक अनुष्ठानों से दूर रहने की सलाह दी जाती रही है. कई परिवारों में आज भी यह परंपरा निभाई जाती है, जहां पीरियड्स के दौरान महिलाएं व्रत तो रख सकती हैं, लेकिन मूर्ति स्पर्श या विधिवत पूजा से दूरी बनाए रखती हैं.
स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना ज्यादा उत्तम
हालांकि, विद्वानों का एक वर्ग यह भी मानता है कि धर्म का मूल भाव आस्था और मन की पवित्रता है. अगर कोई महिला शारीरिक रूप से सक्षम है और उसकी श्रद्धा है, तो वह मानसिक रूप से पूजा कर सकती है. यानी मंत्र जाप, ध्यान और देवी स्मरण बिना किसी बाधा के किया जा सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, व्रत रखने का निर्णय पूरी तरह महिला की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है. अगर कमजोरी, दर्द या असहजता हो तो व्रत ना रखना या हल्का आहार लेना बेहतर माना जाता है. स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना भी उतना ही आवश्यक है जितना कि धार्मिक आस्था.
आधुनिक समाज की सोच में बदलाव
आधुनिक समाज में इस विषय को लेकर सोच में बदलाव भी देखा जा रहा है. कई लोग अब मासिक धर्म को अशुद्धि नहीं बल्कि एक जैविक प्रक्रिया मानते हैं और महिलाओं को किसी भी धार्मिक गतिविधि से अलग रखने के पक्ष में नहीं हैं. वहीं कुछ लोग परंपराओं का पालन करते हुए सीमित रूप में नियमों का अनुसरण करते हैं.
देवी की भक्ति ज्यादा महत्वपूर्ण
धर्म शास्त्रों में स्पष्ट रूप से अलग-अलग व्याख्याएं मिलती हैं और किसी एक नियम को सार्वभौमिक नहीं माना जा सकता. इसलिए यह कहा जा सकता है कि नवरात्रि के दौरान पीरियड आने पर महिला अपनी सुविधा, स्वास्थ्य और पारिवारिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय ले सकती है. आस्था व्यक्तिगत विषय है और इसमें सबसे महत्वपूर्ण है श्रद्धा, ना कि केवल बाहरी नियमों का पालन. नवरात्रि जैसे पावन पर्व में देवी की भक्ति मन से की जाए, यही सबसे बड़ा धर्म माना गया है.
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