अली खामेनेई की मौत पर सवाल, सोनिया गांधी-राहुल गांधी के बयान पर बीजेपी का पलटवार
अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम नेता खामेनेई की मौत हो गई थी. मिडिल ईस्ट लगातार 4 दिनों से जंग जारी है. अयातुल्ला अली खामेनेई की टारगेट किलिंग पर काग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मोदी सरकार की चुप्पी पर निशाना साधते हुए सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा है कि केंद्र का ये रुख भारत की विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल पैदा कर सकता है. सोनिया गांधी ने एक अंग्रेजी अखबार में अपने लेख में लिखा कि ‘आगामी 9 मार्च से जब संसद के बजट सत्र का जब दूसरा चरण शुरू होगा तो इस मामले में सरकार की इस चुप्पी पर स्पष्ट चर्चा होनी चाहिए|’
भाजपा ने किया पलटवार
सोनिया गांधी के इस लेख पर भाजपा ने पटलवार करते हुए जवाब दिया है.बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सोनिया गांधी के लेख पर जवाब देते हुए खामेनेई की एक पुरानी पोस्ट शेयर की है और कहा कि ‘लिखना तो बनता है.’ खामेनेई की इस पोस्ट में उन्होंने लिखा कि नेहरू की ओर लिखी गई ‘ग्लिम्प्स ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री’ का अध्ययन करने से पहले मुझे यह नहीं पता था कि उपनिवेशीकरण से पहले भारत ने इतनी महत्वपूर्ण प्रगति की थी, खामेनेई ने ये पोस्ट 6 अगस्त 2013 में किया था. इसी पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए निशिकांत दुबे ने बस इतना ही कहा कि ‘लिखना तो बनता है?’
सोनिया गांधी के पोस्ट पर राहुल गांधी ने भी क्या रिएक्ट
बता दें कि सोनिया गांधी के लेख पर राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट किया था कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि जब किसी विदेशी नेता की टारगेट किलिंग पर हमारा देश संप्रभुता या अंतरराष्ट्रीय कानून का कोई स्पष्ट बचाव नहीं करता और निष्पक्षता का त्याग कर देता है, तो इससे हमारी विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठते हैं. इस स्थिति में चुप्पी तटस्थता नहीं है|’
राहुल गांधी की पोस्ट का जवाब
राहुल गांधी के इस पोस्ट पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने जवाब दिया. उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि ‘आपकी जानकारी के लिए 1984 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी की हत्या हुई थी तो ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च धार्मिक नेता खुमेनी साहब ने भी किसी प्रकार का बयान नहीं जारी किया था. क्या करें आपको भूलने की बीमारी है|’
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