भारत पर दबाव की कोशिश!: पाकिस्तान के पूर्व ICC प्रमुख की जय शाह को सलाह, कहा- PAK जाकर नकवी और सरकार को मनाएं
टी20 विश्व कप 2026 में भारत-पाकिस्तान मुकाबले को लेकर चल रहे विवाद में अब एक नया और तीखा बयान सामने आया है। आईसीसी और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के पूर्व प्रमुख एहसान मनी ने इस पूरे मामले में सीधे तौर पर भारत और आईसीसी चेयरमैन जय शाह को कटघरे में खड़ा कर दिया है।एहसान मनी ने बड़बोलापन दिखाते हुए कहा है कि जय शाह को खुद पाकिस्तान जाना चाहिए और वहां की सरकार को भारत के खिलाफ मैच के बहिष्कार का फैसला वापस लेने के लिए मनाना चाहिए। यही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि जय शाह को पाकिस्तान की शिकायतें भी सुननी चाहिए।
'जय शाह खुद पाकिस्तान जाएं'
पाकिस्तानी अखबार डॉन से बातचीत में एहसान मनी ने कहा, 'उन्हें पाकिस्तान जाना चाहिए, सरकार को बहिष्कार खत्म करने के लिए मनाना चाहिए और पाकिस्तान की शिकायतें भी सुननी चाहिए। ICC चेयरमैन के लिए बेहतर होगा कि वह खुद पाकिस्तान सरकार से बात करें।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान मुकाबले के बहिष्कार से आईसीसी, ब्रॉडकास्टर्स और मेजबान देशों को करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
बांग्लादेश से शुरू हुआ विवाद, भारत तक पहुंचा
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब बांग्लादेश ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर भारत आने से इनकार कर दिया। पाकिस्तान ने उसका समर्थन किया, लेकिन आईसीसी ने इस दलील को खारिज कर दिया और तय समय पर पुष्टि न मिलने पर बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर कर स्कॉटलैंड को शामिल कर लिया। इसके बाद पीसीबी चेयरमैन और पाकिस्तानी मंत्री मोहसिन नकवी ने इसे नाइंसाफी करार दिया और फिर पाकिस्तान सरकार ने भारत के खिलाफ मैच न खेलने का निर्देश दे दिया।
जय शाह पर क्यों डाला जा रहा दबाव?
एहसान मनी का मानना है कि आईसीसी के डिप्टी चेयरमैन इमरान ख्वाजा इस विवाद को सुलझाने के लिए सही व्यक्ति नहीं हैं। उनका कहना है कि इस मामले में आईसीसी चेयरमैन जय शाह को ही आगे आना चाहिए, क्योंकि भारत और बीसीसीआई की भूमिका को पाकिस्तान अपने फैसले की वजह मानता है।
कानूनी पेंच और भारत पर आरोप
एहसान मनी ने माना कि पाकिस्तान का मामला कानूनी रूप से कमजोर हो सकता है, क्योंकि भारत में होने वाले मैच पहले ही हाइब्रिड मॉडल के तहत श्रीलंका शिफ्ट कर दिए गए थे। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान के केस में कुछ कमजोरियां हैं, लेकिन एक सक्षम कानूनी टीम इसे प्रभावी तरीके से रख सकती है। भारत-पाक मैच का बहिष्कार मेंबर्स पार्टिसिपेशन एग्रीमेंट का उल्लंघन हो सकता है, लेकिन इसके लिए बीसीसीआई का नकारात्मक रवैया जिम्मेदार है, जिसने पाकिस्तान को इतना बड़ा फैसला लेने पर मजबूर किया।'
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