व्रत कथा का पूरा फल पाने के लिए दुर्गा सप्तशती पाठ के नियमों का सही पालन करना जरूरी, ये गलतियां बिलकुल न करें
Durga Saptashati Path : शारदीय नवरात्रि 22 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है और भक्तों द्वारा व्रत किया जाता है। जिसमें दुर्गा सप्तशती का पाठ करने का बेहद खास महत्व होता है। ऐसा करने से जातक को जीवन के हर प्रकार के दुखों से छुटकारा मिल सकता है और सुखों में वृद्धि होती है। लेकिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करते समय कुछ विशेष नियमों का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। इसके 13 अध्याय को प्रत्येक दिन एक-एक करने नहीं पढ़ना चाहिए। अगर व्रत कथा पाठ करते समय ऐसी ही कुछ गलतियां हो जाए तो इसका पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। ऐसे में आइए विस्तार से जानें दुर्गा सप्तशती पाठ के नियम...
दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के नियम
- दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से पहले स्नानादि करके साधक को लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। इन रंगों को नवरात्रि में पूजा के दौरान पहनना बहुत शुभ माना जाता है। इसके बाद, गंगाजल छिड़कर देवी का ध्यान करें।
- देवी का ध्यान करने के साथ-साथ व्रत कथा का पाठ कभी भी सीधा शुरू नहीं करना चाहिए। इससे पहले पवित्र मंत्र का जाप करना आवश्यक माना गया है। ऐसे में दुर्गा सप्तशती के पाठ से पहले 'ओम अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा । यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः' मंत्र का जाप जरूर करें।
- मान्यता है कि किसी भी अध्याय की शुरुआत करने से पहले कवच, कीलक और अर्गला का पाठ जरूर करना चाहिए। सीधा दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से इसका पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। इनका पाठ करने के बाद ही साधक को 13 अध्यायों का पाठ करना चाहिए।
- दुर्गा सप्तशती के पाठ में 13 अध्याय एक ही बार में पढ़ने का विधान होता है। अगर आप नियमित इसी प्रकार दुर्गा सप्तशती पाठ करते हैं तो इससे अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति होती है। लेकिन अगर आपके लिए ऐसा कर पाना संभव न हो तो इसका 3 भाग में पाठ कर सकते हैं। प्रथम चरित्र में पहला अध्याय का पाठ, दूसरे चरित्र में 2 से लेकर चौथा अध्याय और तीसरे चरित्र में पंचम से लेकर 13वें अध्याय का पाठ करना चाहिए।
- अगर साधक तीन चरित्रों में दुर्गा सप्तशती का पाठ न कर पाए, तो देवी के सामने पहले इस बात का संकल्प लेना चाहिए कि आप नवरात्रि के 9 दिनों में दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों का पाठ करेंगे। इस प्रकार नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से साधक के सुखों में वृद्धि होती है और व्रत कथा के पाठ का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
- दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों का पाठ करने के बाद अंत में क्षमा प्रार्थना जरूर करें और रात्रि सूक्तम का पाठ करना भी आवश्यक होता है। नवरात्रि के नौ दिनों में 13 अध्यायों का विधिपूर्वक पाठ करने से आपको जीवन के हर प्रकार के दुखों से छुटकारा मिल सकता है और मनवांछित फल प्राप्त होता है।
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