मध्यप्रदेश में शर्मनाक लापरवाही: पुलिस ने नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को परिजनों के बजाय आरोपी को सौंपा, घर ले जाकर फिर किया रेप, आयोग और कोर्ट की दखल से मामला उजागर
सागर: मध्य प्रदेश में एक बार फिर रेप पीड़ित नाबालिग को उसके परिजन को सौंपने के बजाय रेपिस्ट के परिजन को सौंपने और घर में पीड़िता से दोबारा दुष्कर्म का मामला सामने आया है। मामला सागर जिले के खिमलासा थाने का है। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (Commission for Protection of Child Rights) द्वारा मामले को संज्ञान में लेकर कार्रवाई की जा रही है।
बुंदेलखंड में पन्ना-छतरपुर के बाद अब सागर जिले में पुलिस द्वारा नाबालिग रेप पीड़िता को जिले के खिमलासा थाना क्षेत्र की एक नाबालिग को ललितपुर जिले के सलैया बालवेट का अजय भगा ले गया था। परिजन द्वारा रिपोर्ट कराने के बाद पुलिस ने बच्ची को खोज लिया और थाने ले आई। जहां बच्ची को उसके माता पिता को सौंपने की जगह पुलिस ने आरोपी को सौंप दिया। जिसके साथ आरोपी ने फिर से रेप किया। इस मामले में संज्ञान लेते हुए बाल अधिकार संरक्षण आयोग (SCPCR) ने सागर पुलिस अधीक्षक को जानकारी देते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट में पुलिस के खिलाफ इस्तगासा पेश किया गया
जानकारी अनुसार नाबालिग को जब परिजन को नहीं सौंपने के बजाय आरोपी अजय को ही सौंप दिया गया तो परिजन ने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में पुलिस के खिलाफ इस्तगासा पेश किया। पीड़ित परिजन को न्याय दिलाने के लिए अधिवक्ता कृष्ण मुरारी चौबे ने कोर्ट में इस्तगासा पेश किया गया था।
नाबालिग का गर्भपात कराना पड़ा
मामले में कोर्ट के आदेश पर नाबालिग बच्ची के बयान हुए, जिसमें बताया कि युवक उसे भगाकर ले गया था और उसके साथ रेप किया। नाबालिग गर्भवती भी है। डॉक्टरों की निगरानी में नाबालिग बच्ची का गर्भपात कराने के आदेश भी दिए है। जिसके बाद दो दिन पहले गर्भपात कराया गया।
आरोपी के परिजन ने नाबालिग का फर्जी आधार कार्ड बनवा लिया
पीड़ित नाबालिग के परिजन का आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में पैसे लेकर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया। यही कारण है कि आरोपी के परिजन ने नाबालिग का नकली आधारकार्ड तक बनावा लिया। जिसको न्यायालय में भी पेश कर गुमराह किया। बच्ची से जब पूछताछ की गई तो मामला कुछ और ही निकला। नाबालिग के बनवाए गए आधार कार्ड में बच्ची को बालिग बताया गया है, जबकि परिजनों द्वारा सौंपे गए रिकॉर्ड के अनुसार उसकी उम्र 15 साल 9 महीने थी।
राज्य बाल संरक्षण आयोग ने लिया संज्ञान, कार्रवाई के निर्देश
मामले की जानकारी राज्य बाल संरक्षण आयोग को लगते ही आयोग सदस्य ओंकार सिंह ने पुलिस अधीक्षक से बात कर मामले को गंभीरता से लेने के लिए कहा है। एक सवाल यह भी उठता है कि बच्ची को दस्तयाब करने के बाद पुलिस ने बाल संरक्षण आयोग को सूचना क्यों नहीं दी?
आयोग को सूचना नहीं दी गई, कार्रवाई की ज रही है
पुलिस ने लापरवाही दिखाते हुए नाबालिग को आरोपी को ही सौंप दिया। जिसकी सूचना बाल कल्याण समिति के लिए भी नहीं दी गई। इस मामले में मैंने एसपी से बात की थी। मामले में आयोग द्वारा कार्रवाई की जा रही।
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