गली से ग्लोबल स्टेज तक – अभिषेक ने साबित किया, मेहनत रंग लाती है
नई दिल्ली: भारतीय टीम के सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा एशिया कप में भारतीय टीम के लिए दमदार प्रदर्शन कर रहे हैं। अभिषेक ने पाकिस्तान और बांग्लादेश के खिलाफ सुपर चार चरण मैच में लगातार दो अर्धशतक जड़कर शीर्ष क्रम पर दावा मजबूत कर लिया है। अभिषेक अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जाना पहचाना नाम बन गए हैं, लेकिन उनके लिए इस स्तर पर पहुंचना आसान नहीं रहा।
टीम को दिला रहे मजबूत शुरुआत
अभिषेक का बल्ला एशिया कप में काफी चमक रहा है और वह अब तक पांच मैचों में 248 रन बना चुके हैं जिसमें दो अर्धशतक शामिल हैं। अभिषेक ने शुभमन गिल के साथ मिलकर भारत को तेज शुरुआत दिलाई है और वह लगातार टीम के लिए अच्छी पारी खेल रहे हैं। अभिषेक ने मौजूदा टूर्नामेंट में यूएई के खिलाफ 30, पाकिस्तान के खिलाफ 31, ओमान के खिलाफ 38, पाकिस्तान के खिलाफ 74 और बांग्लादेश के खिलाफ 75 रनों की पारी खेली है। अपने इस शानदार प्रदर्शन के दम पर ही अभिषेक टी20 रैंकिंग में नंबर एक बल्लेबाज बन गए हैं।
आईपीएल से कमाया नाम
27 मार्च 2024 की शाम थी। रोशनी से जगमगाते हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में जब सनराइजर्स ने मुंबई इंडियंस का सामना किया, तो दर्शकों की नजरें पहले ट्रेविस हेड पर टिकी थीं। हेड ने महज 18 गेंदों पर अर्धशतक लगाया, लेकिन असली आतिशबाजी तब हुई जब पंजाब के अमृतसर से आए बाएं हाथ के बल्लेबाज अभिषेक शर्मा मैदान पर उतरे। सिर्फ 23 गेंदों में सात छक्के और तीन चौकों से मुंबई के दिग्गज गेंदबाजों को चारों खाने चित्त कर दिया। उनकी इस धुआंधार पारी ने न सिर्फ मैच का रुख बदल दिया बल्कि उन्हें देशभर की सुर्खियों में ला खड़ा किया। बाएं हाथ के आक्रामक बल्लेबाज और उपयोगी स्पिनर के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले अभिषेक का करियर अब तक शानदार उपलब्धियों से भरा रहा है। हालांकि, भारतीय टीम तक का सफर इतना आसान नहीं रहा है। उन्हें कई चुनौतियों और संघर्षों का सामना करना पड़ा है।
अमृतसर की गलियों से क्रिकेट की ओर सफर
अभिषेक शर्मा का जन्म चार सितंबर 2000 को पंजाब के अमृतसर में हुआ। वे तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। उनके पिता राजकुमार शर्मा खुद पंजाब के लिए लेफ्ट-आर्म स्पिनर रह चुके हैं। 1985-86 में अंडर-22 विजय हजारे ट्रॉफी के फाइनल तक उन्होंने टीम का हिस्सा रहते हुए क्रिकेट खेला। मगर परिस्थितियों ने उनका करियर रोक दिया। दुबई जाकर भी सफलता नहीं मिली तो वे लौटकर बैंक ऑफ इंडिया के लिए खेले और बाद में अमृतसर गेम्स एसोसिएशन के कोच और सेलेक्टर बने। पिता का अधूरा सपना बेटे में पूरा करने का निश्चय उन्होंने किया और यही जुनून अभिषेक की नसों में दौड़ा। महज तीन साल की उम्र में जब बच्चों के खिलौने हाथ में होते हैं, तब अभिषेक प्लास्टिक के बल्ले से शॉट खेलने लगे।
पिता की सीख और बचपन की मेहनत
अभिषेक ने डीपीएस अमृतसर से पढ़ाई की और फिर डीएवी कॉलेज से ग्रेजुएशन। पढ़ाई में अच्छे थे, लेकिन दिल क्रिकेट पर टिका रहा। पिता राजकुमार रोजाना उन्हें प्रैक्टिस के लिए ले जाते। यही मेहनत रंग लाई जब उनका चयन पंजाब अंडर-14 टीम में हुआ। श्रीनगर में हुए अंडर-14 मुकाबले के दौरान महान स्पिनर बिशन सिंह बेदी ने उनकी गेंदबाजी देखी और तारीफ की। बेदी ने कहा कि अभिषेक एक बेहतरीन ऑलराउंडर बन सकते हैं।
रणजी डेब्यू और ऑलराउंड प्रदर्शन
सिर्फ 16 साल की उम्र में अभिषेक ने रणजी ट्रॉफी में कदम रखा। हिमाचल प्रदेश के खिलाफ उन्होंने पहली ही पारी में 94 रन बनाए और एक विकेट भी लिया। हरभजन सिंह ने उन्हें कैप पहनाई और डेब्यू यादगार बना दिया। उस मैच से साफ हो गया था कि यह लड़का आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट का बड़ा नाम बन सकता है।
अंडर-19 का चमकता सितारा
2016 में अभिषेक को भारतीय अंडर-19 टीम का कप्तान बनाया गया। उनकी कप्तानी में टीम ने इमर्जिंग एशिया कप जीता। हालांकि 2018 अंडर-19 वर्ल्ड कप से पहले कप्तानी पृथ्वी शॉ को मिल गई, लेकिन अभिषेक ने बतौर खिलाड़ी टीम में अहम योगदान दिया। बांग्लादेश के खिलाफ उन्होंने शानदार अर्धशतक जड़ा और गेंदबाजी में भी विकेट निकाले। 2015-16 में विजय मर्चेंट ट्रॉफी में 1200 रन और 57 विकेट लेकर वे पहले क्रिकेटर बने जिन्होंने दो 'राज सिंह डूंगरपुर अवॉर्ड' जीते।
IPL में धमाकेदार शुरुआत
जनवरी 2018 में दिल्ली डेयरडेविल्स (अब दिल्ली कैपिटल्स) ने उन्हें 55 लाख रुपये में खरीदा। उसी साल मई में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ उन्होंने सिर्फ 19 गेंदों पर 46 रन बना डाले। उस पारी में तीन चौके और चार छक्के थे। स्ट्राइक रेट 242, यानी असली टी20 का स्वाद। उस पारी ने सबका ध्यान उनकी ओर खींचा।
युवराज सिंह का मार्गदर्शन
अभिषेक शर्मा की सफलता में युवराज सिंह का बड़ा हाथ है। पिता राजकुमार शर्मा ने एक इंटरव्यू में बताया था, 'युवराज सिंह ने अभिषेक की सफलता में बहुत बड़ा रोल निभाया है। उन्होंने उस पर कड़ी मेहनत की है।' युवराज ने न सिर्फ तकनीकी सुधार किया बल्कि अभिषेक के लिए अनुशासन की भी नींव रखी। योगराज सिंह (युवराज के पिता) ने बताया कि युवराज ने अभिषेक को समझाया कि देर रात दोस्तों के साथ बाहर न निकलो, समय पर सो जाओ और फिटनेस को प्राथमिकता दो। युवराज अब भी मजाकिया अंदाज में उन्हें टोकते रहते हैं। एक बार अभिषेक के आउट होने पर उन्होंने कहा, 'वाह अभिषेक वाह… शानदार पारी, लेकिन जिस शॉट पर आउट हुए, वो क्या ही शानदार था! अब तुम्हारे लिए स्पेशल चप्पल इंतजार कर रही है।'
IPL 2024 और 2025: विस्फोटक फॉर्म
2024 में अभिषेक का बल्ला आग उगल रहा था। पूरे सीजन में उन्होंने 400+ रन बनाए और स्ट्राइक रेट 180 से ऊपर रहा। उनकी बल्लेबाजी ने SRH को नई पहचान दिलाई। टीम फाइनल तक पहुंची, लेकिन खिताब से चूक गई। आईपीएल 2024 में अभिषेक ने 16 मैचों में 32.26 की औसत और 204.21 के स्ट्राइक रेट से 484 रन बनाए। इनमें तीन अर्धशतक शामिल हैं। इस सीजन के दम पर उनका चयन भारतीय टी20 टीम के लिए हुआ और यहां से भारत को एक नया सितारा मिला। भारत के लिए उन्होंने कई रिकॉर्ड्स बनाए और विराट कोहली को पीछे छोड़ भारत के लिए सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत टी20 स्कोर अपने नाम किया। अब वह टी20 में आईसीसी रैंकिंग में नंबर एक बल्लेबाज हैं।
2025 के आईपीएल सत्र में पंजाब किंग्स के खिलाफ उन्होंने सिर्फ 55 गेंदों पर 141 रन की पारी खेली। यह किसी भारतीय बल्लेबाज द्वारा आईपीएल का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बना। साथ ही, यह आईपीएल इतिहास का तीसरा सबसे ऊंचा स्कोर भी रहा। इस पारी को देखकर युवराज सिंह ने उनकी तारीफ करते हुए कहा, '98 पर सिंगल… 99 पर सिंगल! इतनी परिपक्वता…अभिषेक, यह शानदार पारी थी।' आईपीएल 2025 में अभिषेक ने 14 मैचों में 33.76 की औसत और 193.39 के स्ट्राइक रेट से 439 रन बनाए। एक तरफ जहां टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, वहीं अभिषेक बल्ले से नए कीर्तिमान रचते गए। आईपीएल 2025 में उन्होंने एक शतक और दो अर्धशतक लगाए।
आर्थिक सफलता और जीवनशैली
2025 में मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अभिषेक की नेट वर्थ 12-15 करोड़ रुपये के बीच है। इसमें बीसीसीआई का ग्रेड-सी अनुबंध (1 करोड़ रुपये वार्षिक), आईपीएल से मोटी कमाई और ब्रांड एंडोर्समेंट शामिल हैं। आईपीएल 2025 में उनकी कीमत 14 करोड़ रुपये रही। कारों के शौकीन अभिषेक कई महंगी और लग्जरी कारों के मालिक हैं। यह उनकी बढ़ती लोकप्रियता और सफलता का सबूत है।
पिता का सपना पूरा हुआ
अभिषेक की कहानी महज क्रिकेट तक सीमित नहीं है। यह उस पिता के सपने की कहानी भी है जो अधूरा रह गया था। राजकुमार शर्मा ने जो रास्ता तय किया था, उसे अब उनके बेटे ने मुकम्मल किया है। अभिषेक न सिर्फ भारतीय क्रिकेट का भविष्य हैं बल्कि युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा भी। अमृतसर की गलियों से निकला यह लड़का आज भारतीय क्रिकेट का चमकता सितारा है। मेहनत, अनुशासन, पिता की सीख और युवराज सिंह की मेंटरशिप ने उन्हें बड़ा बनाया। अभिषेक शर्मा अब न सिर्फ आईपीएल के स्टार हैं बल्कि टीम इंडिया में भी लंबी पारी खेलने की क्षमता रखते हैं और उन्होंने कई मौकों पर ये साबित भी किया है।
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