राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का गयाजी दौरा, विष्णुपद मंदिर में की परंपरागत विधियों से पूजा
गया: विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला अपने 17वें दिन पर है और 21 सितंबर तक इसका समापन होगा। आज श्राद्ध का 14वां दिन है, जिसे वैतरणी सरोवर तर्पण और गौदान के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन वैतरणी वेदी पर स्नान और तर्पण करने से पिंडदानी के 21 कुलों का उद्धार होता है। इसी क्रम में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रविवार को गया पहुंचीं। उन्होंने विष्णुपद मंदिर परिसर में अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना को लेकर विधि-विधान से पिंडदान किया। गर्भगृह में जाकर राष्ट्रपति ने पूजा-अर्चना भी की।
राष्ट्रपति विशेष विमान से गया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरीं और वहां से सख्त सुरक्षा के बीच सड़क मार्ग से विष्णुपद मंदिर पहुंचीं। एयरपोर्ट से मंदिर तक पूरे मार्ग पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग कर आम लोगों का आवागमन अस्थायी रूप से रोक दिया गया। साथ ही ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया गया और निर्धारित मार्ग पर सामान्य वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद कर दिया गया।
राष्ट्रपति के पिंडदान के लिए जिला प्रशासन ने मंदिर परिसर में विशेष इंतज़ाम किए। एल्यूमिनियम फैब्रिकेटेड हॉल में तीन अलग-अलग कक्ष बनाए गए, जिनमें से एक में राष्ट्रपति ने अपने परिजनों के साथ पिंडदान किया। इस दौरान गयापाल पुरोहित राजेश लाल कटरियार के नेतृत्व में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। यह पहला अवसर है जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गया पहुंचकर अपने पूर्वजों का पिंडदान किया।
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