सब्सिडी की बात अलग, टैक्स की मार अलग - यूपी के किसान
नई दिल्ली/लखनऊ।
भारत सरकार ने जीएसटी की दरों में बड़े बदलाव किए हैं। बुधवार को हुई 56वीं जीएसटी परिषद बैठक में आम जनता को राहत देते हुए कई वस्तुओं पर कर दरें घटाई गईं। हालांकि, इस पर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता राकेश टिकैत ने असंतोष जताया है।
टिकैत की नाराज़गी
राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों पर अभी भी 5% जीएसटी लागू है। उन्होंने कहा - "हमारी मांग थी कि कृषि उपकरणों को 0% जीएसटी के दायरे में लाया जाए। सरकार एक तरफ सब्सिडी की बात करती है और दूसरी तरफ टैक्स लगाती है। खेती-किसानी से जुड़ी चीज़ें कोई व्यापारिक वस्तु नहीं, बल्कि ज़रूरत की चीज़ें हैं।"
जीएसटी परिषद का फैसला
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैठक के बाद जानकारी दी कि रोजमर्रा की वस्तुओं जैसे बालों का तेल, साबुन, साइकिल आदि पर जीएसटी 12% और 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है।
छेना, पनीर, रोटी और पराठा को पूरी तरह जीएसटी मुक्त कर दिया गया।
जीवन रक्षक दवाओं पर भी अब कोई कर नहीं लगेगा। बीमा पॉलिसियों (जीवन और स्वास्थ्य) पर जीएसटी से छूट दी गई। छोटी कारों और 350 सीसी तक के दोपहिया वाहनों पर 18% जीएसटी जारी रहेगा। तंबाकू, पान मसाला और सिगरेट पर विशेष दर से 40% जीएसटी लगाया जाएगा। नई जीएसटी दरें (तंबाकू उत्पादों को छोड़कर) 22 सितंबर से लागू होंगी।
मायावती की अपील
इसी बीच बसपा प्रमुख मायावती ने उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, हरियाणा और असम में आई बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने सरकार और समाजसेवी संगठनों से प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आने की अपील की।
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