गुजरात ब्रिज हादसे के 27 दिन बाद टैंकर हटाने को कैप्सूल बैलून तकनीक का सहारा
अहमदाबाद: गुजरात में पिछले पुल हादसे के बाद करीब एक महीने बाद लटके टैंकर को निकालने के लिए अनूठा ऑपरेशन शुरू किया गया है। टैंकर को क्रेन के जरिए हटाना असंभव था। ऐसे में करीब तीन हफ्ते के इंतजार के बाद अब एक अनूठी तकनीक से इस टैंकर को निकाला जाएगा। ब्रिज हादसे के रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा हो गया था लेकिन टैंकर लटका हुआ था। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद अब आणंद जिला प्रशासन ने टैंकर हटाने का काम पोरबंदर की एक फर्म को सौंपा है।
बैलून तकनीक से हटेगा टैंकर
कैप्सूल बैलून तकनीक से टैंकर को हटाया जाएगा, क्याेंकि ट्रक जिस जगह लटका हुआ है। उसके जरा सी चूक होने पर महीसाागर नदी में गिरने का भी खतरा बना हुआ है। यही वजह है कि प्रशासन फूंक-फूंककर कदम रख रहा है। पिछले महीने 9 जुलाई सुबह आणंद-वडोदरा को जोड़ने वाला ब्रिज टूट गया था। इस हादसे में 21 लोगों की मौत हुई थी। आणंद के कलेक्टर प्रवीण चौधरी के अनुसार ट्रक को बचाना काफी कठिन था। इसलिए तमाम चीजों को ध्यान में रखने के बाद पोरबंदर के विश्वकर्मा ग्रुप द्वारा अब टैंकर को निकालने का काम शुरू किया गया है। इसमें हाइड्रोलिक स्टैंड जैक का इस्तेमाल किया जाएगा।
क्या है कैप्सूल बैलून तकनीक?
जैसे कार में जैक लगाया जाता है, वैसे ही टैंकर के टायरों के बीच खाली जगह में एक खाली कैप्सूल बैलून रखा जाएगा।
कैप्सूल बैलून को टैंकर के नीचे रखा जाएगा और उसमें हवा भरी जाएगी।
कैप्सूल बैलून में हवा भरते ही टैंकर ऊपर आ जाएगा।
टैंकर को पुल की सतह पर लाया जाएगा।
टैंकर के पुल की सतह पर पहुंचने के बाद, उसे स्वचालित मशीनों के जरिए उठाकर हटाया जाएगा।
1 KM बनाया कंट्रोल रूम
गंभीरा ब्रिज के बीच में लटके ट्रैंकर को निकलने के लिए फर्म ने 1 किलोमीटर दूर एक नियंत्रण कक्ष तैयार किया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गंभीर पुल पर लटके टैंकर को कैप्सूल बैलून के जरिए हटाया जाएगा। टैंकर को पुल से हटाने के लिए लगभग एक किलोमीटर दूर एक नियंत्रण कक्ष तैयार किया गया है। जहां से नियंत्रण कक्ष का ऑपरेटर स्वचालित मशीनों के जरिए टैंकर को पुल से अंकलाव की ओर खींचेगा। इस पूरे ऑपरेशन में समय लगेगा। टीम ने पिछले कुछ दिनों जरूरी तैयारियां पूरी कर ली हैं। टैंकर के शनिवार तक निकलने की उम्मीद जा रही है।
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