नर्मदा के ऊपर नहर तो नहर के ऊपर हाईवे, जबलपुर में इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना
जबलपुर: संस्कारधानी से करीब 14 किमी दूर इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना देख लोगों को हैरत में डाल देता है. पानी के ऊपर पानी बहते देख लोग कहते हैं ये हैं इंजीनियरिंग का जादू. दरअसल यहां नीचे नर्मदा नदी अपने तेज प्रवाह के साथ हिलोरें मारती बहती है तो ठीक इसके ऊपर नर्मदा की ही नहर बहती है और फिर इस नहर के ऊपर से हाईवे भी गुजरता है.
इंजीनियरिंग का एक ऐसा बेजोड़ नमूना आज से 30 साल पहले बनाया गया था जिसमें नर्मदा नदी के ऊपर से ही उसी की एक नहर निकाल दी गई थी और इसी नहर के ठीक ऊपर से एक नेशनल हाईवे निकाल दिया गया. 30 साल बाद आज भी यह सड़क पूरी तरह चालू है. इस पर आज भी वाहन और नहर एक साथ देखे जा सकते हैं.
30 साल पहले बना इंजीनियरिंग का नमूना
आज से लगभग 30 साल पहले इंजीनियरिंग के इस बेजोड़ नमूने को बनाया गया था. यह एक्वा डक्ट नर्मदा नदी के तल से लगभग 100 फीट ऊपर से बहती है. नर्मदा नदी के ऊपर इसकी लंबाई लगभग 300 मीटर है. नर्मदा नदी पर छोटे और बड़े लगभग 21 पिलर इस पुल के नीचे हैं, जो इस नहर को थामे हुए हैं.
नहर और हाईवे एक साथ
देश में कई जगहों पर नदी के ऊपर से नहर निकलती है लेकिन तिलवारा एक्वाडक्ट की सबसे अनोखी बात यह है कि नहर के ठीक ऊपर से नेशनल हाईवे 47 गुजरता है जो नागपुर से बनारस जाता है. इस एक्वा डक्ट को जल संसाधन विभाग ने बनाया था लेकिन जल संसाधन विभाग अब इस एक्वाडक्ट को नेशनल हाईवे अथॉरिटी को सौंप रही है.
जल संसाधन विभाग की इंजीनियर संगीता दिवाकर बताती हैं कि "बहुत दिनों तक ऊपर की सड़क का मेंटेनेंस भी हम ही करते थे लेकिन अब सड़क और नहर दोनों का ही मेंटेनेंस नेशनल हाईवे अथॉरिटी करेगी."
तिलवारा एक्वा डक्ट
बता दें कि जबलपुर में नर्मदा नदी पर बरगी बांध बना हुआ है बरगी बांध का पानी कई नहरो के जरिए जबलपुर, नरसिंहपुर और कटनी जिलों के लिए भेजा जाता है. बरगी बांध की एक नहर बांध से लगभग 25 किलोमीटर दूर नर्मदा नदी के ऊपर से ही नर्मदा नदी को क्रॉस करते हुए जाती है. यह आगे जबलपुर के मझौली पाटन इलाके में पानी पहुंचती है.
मेंटेनेंस की सख्त जरूरत
बीते 30 सालों में देखा जाए तो इस सड़क से करोड़ों वाहन गुजर चुके हैं और इस नहर से भी करोड़ों गैलन पानी बह चुका है. ऐसी स्थिति में अब यह एक्वाडक्ट मेंटेनेंस के लिए तरस रही है. इसके कई पिलर्स के नीचे लगातार पानी रिस रहा है.
इंजीनियर संगीता दिवाकर का कहना है कि "इसके ट्रांसफर की प्रक्रिया चल रही है इसलिए जैसे ही नेशनल हाईवे अथॉरिटी इसका पूरा चार्ज ले लेगी तब वह मेंटेनेंस करवाएगी." सरकार ने इस पुल के निर्माण के लिए एक टोल भी लगाया था, जो कई साल पहले इसलिए बंद कर दिया गया क्योंकि इस निर्माण की राशि सड़क से निकलने वाले लोगों से वसूल ली गई.
एक दूसरा पुल भी हो चुका तैयार
इंजीनियरिंग के ऐसे बड़े निर्माण कम ही देखने को मिलते हैं. आज इस निर्माण को बनाने में करोड़ों रुपया खर्च होगा. इसलिए जरूरत है कि ऐसे निर्माणों का लगातार मेंटेनेंस किया जाए ताकि इसका फायदा ज्यादा से ज्यादा दिनों तक लिया जा सके. हालांकि तिलवारा में लगातार बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए नेशनल हाईवे ने नर्मदा नदी के तिलवारा घाट पर एक दूसरा पुल और बना दिया है.
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