अब डेफ एआई के जरिए खतरों की भविष्यवाणी करेगी सेना, खुफिया तंत्र होगा और मजबूत
चंडीगढ़ (पंजाब)। ऑपरेशन सिंदूर के बाद सभी सैन्य व अर्ध सैन्य बल अपने खुफिया तंत्रों को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस ऑपरेशन के बाद यह बात साफ हो गई है कि साइबर और आईटी युग में सैन्य बलों को अब देश की सुरक्षा और सीमा पार के खतरे को भांपने के लिए कई तरह की नई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इसलिए सेना अब अपनी इंटेलिजेंस विंग को और मजबूत करते हुए डेफ एआई (डिफेंस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से खतरे की खुफिया जानकारियां जुटाएगी। भूमि युद्ध अध्ययन केंद्र इसमें भारतीय सेना की मदद कर रहा है। सैन्य अफसरों का मानना है कि दुश्मनों से खतरे का पूर्वानुमान लगने में एआई आधारित इस सिस्टम से बड़ी मदद मिलेगी। वर्तमान वार फेयर परिदृश्य में सैन्यबलों के समक्ष डीप फेक, लेजर लाइट माड्यूल और क्वांटम खतरे, ये बड़ी चुनौतियां हैं।
डीप फेक एक ऐसा एआई सिस्टम है, जिसका उपयोग विश्वसनीय दिखने वाले फर्जी चित्र, ध्वनी और वीडियो बनाने के लिए किया जा रहा है। यह ऐसे लोगों और घटनाओं का निर्माण करता है जो वास्तव में मौजूद नहीं हैं या घटित ही नहीं हुए हैं। डीपफेक तकनीक का सबसे अधिक उपयोग झूठी जानकारियां या दुष्प्रचार फैलाकर गुमराह करना होता है। इसी तरह लेजर लाइट मॉड्यूल (एलएलएम) विभिन्न प्रकार के लाइट सोर्सिस का उपयोग कर सटीक लक्ष्य प्राप्ति और लक्ष्य को चिह्नित करने में मददगार बनता है। उधर डिजिटल परिदृश्य में क्वांटम खतरा एक गंभीर चिंता का विषय है। इस तकनीक के जरिये सूचनाओं को ऐसे तरीकों से परिवर्तित व डेवलप किया जा सकता है जो कि पारंपरिक कंप्यूटरों से असंभव माने जाते हैं। उक्त तरह की खतरों की पहचान के लिए भारतीय सेना अब डेफएआई की मदद लेगी।
मेलवेयर व फिशिंग हमलों से रखेगा सतर्क
दुश्मन के एआई संचालित हमलों को निष्क्रिय करने में भी डेएफएआई सक्रिय रहेगा। इसके अलावा फिशिंग हमले यानी विभिन्न माध्यमों से संवेदनशील जानकारी चुराने की कोशिश भी सेना के लिए बड़ी चिंता का विषय है। ऐसे हमलों में अधिकतर निशाना सेना के अफसर व जवान ही बनते हैं। डेफएआई का इस्तेमाल इस तरह के हमलों को पहचानने और उन्हें रोकने में किया जाएगा।
फर्जी एआई ईमेल से करेगा सावधान
जवानों और अफसरों को कई बार व्यक्तिगत रूप से एआई जेनरेटेड ऐसी फर्जी ईमेल प्राप्त होती हैं, जो उन्हें अपने सिस्टम का ही हिस्सा प्रतीत होती हैं। इस माध्यम से दुश्मन उनसे गोपनीय व संवदेनशनील जानकारी व डाटा हासिल करने की कोशिश में जुटे रहते हैं। कई बार इन जवानों व अफसरों को ईमेल के जरिये सिस्टम अपडेट करने के लिए भेजे गए लिंक पर क्लिक करने के लिए भी कहा जाता है। लिंक क्लिक करते ही संबंधित ईमेल सर्वर हैक कर लिया जाता है। डेएफएआई ऐसी फर्जी ईमेल को पहचानने, भविष्य में इसी तरह के हमलों को रोकने और इससे सावधान करने के लिए भी काम करेगा।
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