खाद्य तेलों पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटी: केंद्र का कदम, क्या मिलेगी महंगाई से मुक्ति?
वित्त मंत्रालय की तरफ जारी एक गजट नोटिफिकेशन में बताया गया है कि कच्चे खाद्य तेल के आयात पर लगने वाले शुल्क में 10 फीसदी की कटौती की गई है. कच्चे तेल के आयात पर शुल्क की नई दर 31 मई से ही लागू कर दी गई है. भारत दुनिया में खाद्य तेलों के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में शामिल है. लगातार बढ़ती डिमांड को पूरा करने के लिए भारत कच्चे खाद्य तेलों का आयात करता है. केंद्रीय खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के मुताबिक देश को मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को पूरा करने के लिए कच्चे खाद्य तेल का आयात करना पड़ता है.
कितना घटाया गया आयात शुल्क?
खाद्य तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को काबू करने के लिए केंद्र सरकार ने कच्चे खाद्य तेलों के आयात पर लगने वाली बेसिक इम्पोर्ट ड्यूटी में 10 फीसदी की कटौती की है.
कितना तेल आयात करता है भारत?
भारत कच्चे खाद्य तेल यानी वनस्पति तेल की अपनी डिमांड का करीब 70 फीसदी हिस्सा आयात के जरिये ही पूरा करता है. भारत मुख्य रूप से इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड से पाम ऑयल खरीदता है. वहीं, अर्जेंटीना, ब्राजील, रूस और यूक्रेन से सोयाबीन और सूरजमुखी का तेल आयात करता है. आने वाले दिनों में सरकार के इस फैसले की वजह से पाम ऑयल, सोयाबीन और सूरजमुखी के तेल के दाम में गिरावट देखने को मिल सकती है.

कितनी कम हुई इम्पोर्ट ड्यूटी?
सरकार ने कच्चे पाम तेल, कच्चे सोया तेल और कच्चे सूरजमुखी तेल पर बेसिक कस्टम या इम्पोर्ट ड्यूटी को पहले के 20% से घटाकर 10% कर दिया है. इससे तीनों तेलों पर कुल आयात शुल्क पहले के 27.5% से घटकर 16.5% हो गया है. इससे पहले सितंबर 2024 में, भारत ने कच्चे और रिफाइंड खाद्य तेलों 20% की दर से बेसिक कस्टम ड्यूटी लगाने का फैसला किया था. बहरहाल, अब नई दरों के बाद, कच्चे पाम तेल, कच्चे सोया तेल और कच्चे सूरजमुखी तेल पर पहले के 5.5% की तुलना में 27.5% आयात शुल्क लगाया जाएगा, जबकि तीनों तरह के रिफांइड तेल पर 35.75% इम्पोर्ट ड्यूटी लगाई गई है.
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