जबलपुर हाईकोर्ट में जजों पर अपमानजनक टिप्पणी, एडवोकेट पर आपराधिक अवमानना का मामला
जबलपुर: एक मामले की सुनवाई के दौरान एक एडवोकेट ने कथित तौर पर हाईकोर्ट जजों व कोर्ट के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी कर दी. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सुनवाई कर रहीं जस्टिस अनुराधा शुक्ला ने एडवोकेट के खिलाफ आपराधिक अवमानना का मामला चलाने के लिए चीफ जस्टिस को मामले की जानकारी भेजी. इसके बाद बुधवार को चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैथ व जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने एडवोकेट के खिलाफ आपराधिक अवमानना की सुनवाई की.
एडवोकेट ने हाईकोर्ट में ऐसा क्या कहा?
दरअसल, क्रिमिनल रिवीजन अपील की सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट में विवादित टिप्पणी की. छिंदवाड़ा निवासी राजहंस बगाडे व विजय की ओर से एडवोकेट क्रिमिनल रिवीजन अपील पर बहस कर रहे थे. इसी दौरान 22 मार्च को उन्होंने विवादित टिप्पणी करते हुए कहा,
'' इस कोर्ट में चार घंटो से तमाशा चल रहा है, मैं बैठे देख रहा हूं. हाईकोर्ट जज दूसरी जगह जाकर कहते है कि नए जज का अपॉइंटमेंट करो लेकिन जजेस का हाल तो देखो, जो दिल्ली में है यह भी देखा जाए. यहां पेडेंसी बढ़ रही है और हमें हैरेस किया जा किया जा रहा है. मैं आज शाम को जाकर मोहन यादव को बोलता हूं. यह केस 20 बार लग चुका है, बड़ी मुश्किल से आज नंबर आया. मैं अपने केस की बहस यहां नहीं करना चाहता. मेरे केस दूसरे बैंच में भेज दीजिए.''
एडवोकेट की टिप्पणी पर कोर्ट सख्त
अधिवक्ता की टिप्पणी को जस्टिस अनुराधा शुक्ला की एकलपीठ ने न्यायालय के खिलाफ अपमानजनक और अवमाननापूर्ण माना. उन्होंने अपमानजनक टिप्पणी को आदेश की प्रमाणित प्रति में शामिल करते हुए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भेजने के आदेश जारी किए थे. एकलपीठ ने अपने आदेश में चीफ जस्टिस से आदेश का अवलोकन कर कार्यवाही का आग्रह किया था.
बिना शर्त माफी के लिए तैयार एडवोकेट
चीफ जस्टिस ने मामले को संज्ञान में लेते हुए अधिवक्ता के खिलाफ न्यायालय की आपराधिक अवमानना की सुनवाई के आदेश जारी किए थे. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैथ व जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने आपराधिक अवमानना की सुनवाई की गई. इस दौरान अधिवक्ता ने उपस्थित होकर कोर्ट के समक्ष बिना शर्त माफीनामा पेश करने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया. युगलपीठ ने सुनवाई के बाद दो सप्ताह का समय प्रदान किया है.
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