मखाना की वैश्विक मांग ने बिहार को एक नया मुकाम दिलाया
बिहार के सुपर फ़ूड मखाना का जिक्र PM मोदी कई बार कर चुके हैं. उन्होंने मखाना को सुपरफूड का दर्जा देते हुए कहा कि वो खुद इसे साल में 300 दिन खाते हैं. बजट में भी बिहार को दिए गए बजट में मखाना बोर्ड बनाने की चर्चा की गई. अब हाल ही में PM मोदी ने इस सुपर फ़ूड मखाना को दुनिया के बाजारों तक पहुंचाने की बात कही है. बिहार का मखाना भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में परचम लहरा रहा है. अमेरिका से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक इस सुपर सुपर फ़ूड की गजब की डिमांड है. हर साल कई टन मखाना इन देशों में निर्यात किया जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कितना बड़ा है सुपर फ़ूड मखाना का कारोबार ?
कितना बड़ा है कारोबार?
रिपोर्ट्स की माने तो भारत में मखाना का मार्केट तेजी से बढ़ रहा है. अनुमान के मुताबिक भारत में मखाने का मार्केट करीब 8 अरब रुपयों का है. वहीं IMARC के एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2032 तक ये मार्केट करीब 19 अरब रुपयों का हो जाएगा. वहीं, मखाना को वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने की ओर सरकार अब बढ़ रही है. बजट में ऐलान के बाद बिहार सरकार का लक्ष्य 2035 तक मखाना के प्रोडक्शन क्षेत्र को 70,000 हेक्टेयर तक बढ़ाना है, जिससे मखाना का उत्पादन 78,000 मीट्रिक टन तक पहुंच जाएगा.
किसानों की बढ़ेगी कमाई
इससे न सिर्फ बिहार के मखाने को दुनिया में पहचान मिलेगी बल्कि मखाना किसानों की कमाई भी 550 करोड़ रुपये से बढ़कर 3,900 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है. इसके साथ ही, मखाना की मार्केट वैल्यू अगले साल में 2,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 13,260 करोड़ रुपये हो सकती है.
बिहार दुनिया के 85 फीसदी मखाने का उत्पादन करता है. पिछले 10 साल में मखाने की खेती में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है. तालाब आधारित खेती से अब खेत आधारित खेती की ये सुपर फ़ूड बढ़ रहा है. जिसके परिणामस्वरूप इसका उत्पादन दोगुना होकर अब 56,000 टन से भी ज्यादा हो गया है.
इन देशों में है सबसे ज्यादा डिमांड
मखाने की डिमांड भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी है. बिहार का मखाना अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, नेपाल, मालदीव में निर्यात किया जाता है. बिहार के मखाने का सबसे बड़ा खरीदार अमेरिका है.
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